लघुकथा :
कॉकरोच
"अरे आज तुम याद से आफिस से आते वक्त कॉकरोच मारने का स्प्रे लेते आना, घर में बहुत कॉकरोच हो गए हैं।" राधा किचन से ही चिल्लाकर अपने पति से बोली। पति घबराया सा दौड़ता हुआ किचन में आया और बोला - "पागल हो गई हो क्या? धीरे बोलो, कोई सुन लेगा! "
"तो सुनने दो ! अब क्या घर की साफ़-सफाई की चीजें भी न मंगावें ।" पत्नी तुनक कर बोली।
"तुम तो मुझे जेल पहुंचा कर ही मानोगी। तुम्हें पता नहीं कॉकरोच जनता पार्टी नाराज़ हो जायेगी। पूरा युथ उसके सपोर्ट में खड़ा है। एक शब्द ने इतना बवाल मचा दिया। पति चिढ़कर बोला।
"अच्छा तो अब अपने बच्चों को हम कुछ सिखाएं भी नहीं, इतिहास गवाह है सारी गलतियां युवावस्था में ही होती है क्योंकि इस उम्र में वे इतने परिपक्व नहीं होते कि अपना भला-बुरा समझ आ सकें और इसीलिए उन्हें बड़े- बुजुर्गों से सदैव मार्गदर्शन लेना चाहिए । बाप-बाप ही होता है । " पत्नी ने संयम से जवाब दिया ।
-- हेमलता शर्मा भोली बेन
इंदौर मध्यप्रदेश
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