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काव्य : पूर्णिका - सीताराम साहू'निर्मल' , छतरपुर मप्र


 काव्य : 

पीड़ाओं का स्वागत करना,दोनों हाथ पसार कर

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पीड़ाओं का स्वागत करना दोनों हाथ पसार कर।

जीवन  अमृत बन जायेगा ,नहीं  बैठना हार कर। 


विद्रोही मन दुखसे हर पल,घबराता रहता क्यों है,

सुख-दुख दोनो संग रहना है,दोनों से इजहार कर।


तू क्यों हारा ,हार नहीं जब,तेरी  किस्मत  में प्यारे,

तू आगे ही बढ़ता जा मिलता जा सबसे प्यार कर। 


प्रेम मार्ग पर जाना राही,गीत प्रेम के गाना राही,

जो भी मिले प्रेमपथ पर उनसे न तू तकरार कर। 


तुझे आज है जीभर जीना,आहें न गरीब की पीना,

कलको किसने देखा भाई,जी लें आज सुधारकर।


सुंदर ऐसे जीना जीवन,हर प्राणी में कर प्रभु दर्शन, 

निर्मल से मिलते है कान्हा,न जी उन्हें बिसार कर। 


 - सीताराम साहू'निर्मल' , छतरपुर मप्र

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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