प्रवाह रुके न, स्वभाव बदले न , यही सिखाती हे गंगा मैया - पंडित हर्षित बाजपेयी
इटारसी। द्वारकाधीश मंदिर इटारसी में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के द्वितीय दिवस भागवत किंकर पंडित हर्षित बाजपेयी ने मंगलाचरण व्याख्या, शुकदेव जन्म, नारद जन्म एवं महाभारत के प्रसंगों को विस्तार से सुनाया।गंगा दशहरा के पावन पर्व पर गंगा मैया का चरित्र बहुत ही सुंदर और प्रामाणिक तरीके से सुनाया गया।उन्होंने कहा गंगा का प्रवाह पहाड़ों, चट्टानों या किसी भी रुकावट से रुकता नहीं हे, गंगा सदैव बहती ही रहती हे , ओर गंगा जल का स्वभाव हे जीव को शीतलता प्रदान करना तो अपना स्वभाव भी किसी भी स्थिति में बदलती नहीं हे।यही समाज को सीखना चाहिए, जीवन में आने वाली किन्हीं भी विपरीत परिस्थितियों में अपना प्रवाह रुकना नहीं चाहिए, ओर अपना श्रेष्ठ स्वभाव भी बदलना नहीं चाहिए।महाराज जी ने बताया भगवान राधा कृष्ण का द्रवीभूत ,विगलित स्वरूप ही गंगा जल बन गया।वर्ष में एक बार भी गंगा स्नान कर लिया जाय तो पूरे वर्ष उसका असर हम पर रहता हे।बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण करने पहुंच रहे हे।प्रारम्भ में विष्णु- अनिता चौरसिया, ध्रुव-अनिता चौरसिया,एवम विराट (लव) ,दीपक चौरसिया ने व्यास पीठ का पूजन किया।
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