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काव्य : शिरीष - डा.नीलम , अजमेर


 काव्य : 

शिरीष


जेठ की प्रचण्ड 

अगन में

पत्थर पिघलते

देखा है

तपते रेगिस्तान में

शूल को जलते

देखा है

कोमल-गात शिरीष

मगर तुझे

लू -आँधी के प्रचण्ड

वेग में भी

शाखाओं पर

इठलाते, अठखेलियाँ

करते देखा है।


है मौन अवधूत

सुख-दुःख में

एक समाना,विरक्त

लोभ-मोह से

अचल,अडिग,निष्प्रभ

अनासक्त रह

जीने की कला 

सिखलाता है,

हाँ जिजीविषा की

असीम लालसा

होते भी

नव-पल्लव आने पर

त्याग देह देता है।

    - डा.नीलम , अजमेर

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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