सरोकार :
हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने दिया पेंशनरों के हित में फैसला : मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्य शासन करें पालन
- डाॅ. चन्दर सोनाने , उज्जैन
हाल ही में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर द्वारा मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ दोनों राज्यों के पेंशनरों के हित में बड़ा फैसला दिया है। इस फैसले के अनुसार दोनों राज्यों को छठवें वेतनमान का 32 माह का एरियर और सातवें वेतनमान की 27 माह की एरियर राशि का 120 दिनों में मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्य के पेंशनरों के भुगतान करने के आदेश दिए है।
छत्तीसगढ़ पेंशनर संघ के प्रान्ताध्यक्ष श्री चेतन भारती ने 12 अगस्त 2021 को अपने अधिवक्ता श्री क्षितिज शर्मा के माध्यम से छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर में दोनों राज्यों के पेंशनरों के साथ हो रहे अन्याय के विरूद्ध न्याय प्राप्त करने के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की थी। उसी याचिका के संबंध में उच्च न्यायालय द्वारा यह फैसला दिया गया है।
उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्य के पेंशनरों को राज्य सरकारों द्वारा छठवें वेतनमान का 1 जनवरी 2006 से 31 अगस्त 2008 तक 32 माह का एरियर नहीं दिया गया था। इसी प्रकार सातवें वेतनमान में भी 1 जनवरी 2016 से 31 मार्च 2018 तक 27 माह की एरियर राशि का भुगतान अभी तक नहीं किया गया है।
मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ राज्य के पेंशनर दोनों राज्य सरकारों के द्वारा किए जा रहे अन्याय के कारण दुखी और परेशान थे । खास बात यह है कि दोनों राज्य सरकारों द्वारा नियमित कर्मचारियों को छठवें और सातवें वेतनमान की एरियर की राशि का भुगतान कर दिया गया। किंतु पेंशनरों के साथ दोनों राज्य सराकरों द्वारा भेदभाव करते हुए छठवें और सातवें वेतनमान की एरियर राशि नहीं दी गई।
मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्य के पेंशनर संगठन द्वारा दोनों राज्य सरकारों के मुख्यमंत्री, वित्तमंत्री, वरिष्ठ अधिकारियों से लगातार मिलकर और ज्ञापन देकर एरियर राशि देने का अनुरोध कर रहे थे। किंतु दोनों राज्य सरकारों ने पेंशनरों की अभी तक नहीं सुनी। पेंशनर संगठनों द्वारा छठवें और सातवें वेतनमान की एरियर राशि के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है। किन्तु उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। इस कारण मजबूर होकर पेशनर संगठन ने उच्च न्यायालय की शरण ली और उच्च न्यायालय द्वारा पेंशनरों के हित में निर्णय लिया गया।
मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्य के मुख्यमंत्रियों से अनुरोध है कि वे उच्च न्यायालय के निर्देश के अनुसार 120 दिनों में छठवें और सातवें वेतनमान की एरियर राशि का भुगतान करें। अब अन्याय बहुत हो चुका। पेंशनरों के हित में उच्च न्यायालय का जो निर्देश आया है, उसके लिए दोनों राज्यों के पेंशनर संगठनों को एकजुट होकर एरियर राशि प्राप्त करने की आवश्यकता है।
पिछले दिनों 10 अप्रैल 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने भी महँगाई भत्ते और महँगाई राहत पर बड़ा फैसला दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि राज्य सरकारें कर्मचारियों और पेंशनधारियों में भेदभाव नहीं कर सकती। क्योंकि महंगाई का असर दोनों पर समान रूप से पड़ता है। इसलिए राज्य सरकारों को महंगाई भत्ता और महंगााई राहत देते समय भेदभाव नहीं करना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस प्रसन्ना बी.वराले की पीठ ने पिछले दिनों केरलम सरकार और केरलम राज्य सड़क परिवहन निगम की अपीलों को खारिज कर दिया, जिनमें पेंशनधारियों को अलग दर से मंहगाई राहत देने का फैसला सही ठहराया गया था। कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि रिटायर्ड हो चुके कर्मचारियों को भी समानता का अधिकार है। इसलिए उन्हें किसी भी तरह से कमतर नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा के पेंशनर केवल पेंशन के ही नहीं, बल्कि महंगाई राहत के भी हकदार है, जो समय-समय पर महंगाई के आधार पर बढ़ाई जाती है।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का असर देशभर के लाखों पेंशनधारियों पर पड़ सकता है। अब राज्य सरकारें और सरकारी संस्थानों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे महंगाई राहत तय करते समय सेवारत और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के बीच कोई भेदभाव नहीं करें। यह फैसला पेंशधारियों के अधिकारों को मजबूत करता है। और ये संदेश भी देता है कि कर्मचारियों के रिटायर्ड होने के बाद भी पेंशनरों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि आर्थिक नीतियों में भी समानता का सिद्धांत लागू होगा और किसी भी तरह की मनमानी को स्वीकार नहीं किया जायेगा।
पेंशनरों को पेंशन राहत देते समय एक बड़ा अड़ंगा मध्यप्रदेश राज्य गठन अधिनियम की धारा 49 (6) का बहाना लेकर वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा पिछले अनेक सालों से भेदभाव किया जा रहा है। उक्त धारा का बहाना लेकर राज्य सरकार सेवारत कर्मचारियों को तो महंगाई भत्ता देने का आदेश उसी तारीख से देते है, जिस तारीख से केन्द्र ने महंगाई भत्ता बढ़ाया है। किन्तु पेंशनरों को उसी समय महंगाई राहत स्वीकार नहीं करते हुए धारा 49 (6) का बहाना करते हुए छत्तीसगढ़ सरकार की सहमति प्राप्त करने के लिए पत्र व्यवहार का नाटक करती रहती है। छत्तीसगढ़ सरकार भी पेंशनरों के साथ भेदभाव करते हुउ उस तारीख से पेंशन नहीं देती है, जिस तारीख से केन्द्र सरकार मंहगाई भत्ता, महंगााई राहत की घोषणा करता है। देर से महंगाई राहत की सहमति प्राप्त होने के कारण मध्यप्रदेश सरकार छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा दी गई तारीख से महंगाई राहत की घोषणा करती है, जिसमें कई महीनों की देरी हो जाती है और पेंशनरों को एरियर की राशि भी नहीं दी जाती। इस कारण वर्षों से पेंशनरों के साथ भेदभाव होता आ रहा है। समस्या की जड़ धारा 49 (6) को शीघ्र समाप्त करने की आवश्यकता है। इसके लिए दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री उक्त धारा को समाप्त करने का निर्णय लेकर केन्द्र सरकार को भेजे। इस धारा के समाप्त करने के बाद ही पेंशनरों के साथ हो रहा भेदभाव खत्म होगा।
उच्च न्यायालय बिलासपुर और सुप्रीम कोर्ट के उक्त दोनों फैसलों का आदर और सम्मान करते हुए मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्य के मुख्यमंत्रियों को पेंशनरों के हित में शीघ्र निर्णय लेना चाहिए। आशा है दोनों राज्य के मुख्यमंत्री अपनी संवेदनशीलता का परिचय देंगे और पेंशनरों के हित में सही निर्णय लेंगे।
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