ad

काव्य : तप रहा नभ,आर्त पक्षी कर रहे क्रंदन गगन में -सीताराम साहू'निर्मल',छतरपुर


 

काव्य : 

तप रहा नभ,आर्त पक्षी कर रहे क्रंदन गगन में

////////////////पर्यावरण संरक्षण///////////////

तप रहा नभ,आर्त पक्षी,कर रहे क्रंदन गगन में।

वृक्ष अब कम हो रहे हैं,आर्द्रता कम है पवन में।

सड़क का विस्तार होता ,वृक्ष कटते जा रहे हैं।

रेल लाइन बढ़ रही, पर्वत भी हटते जा रहें हैं।

नदियों को नित बांधके,जंगल हमारे घट रहें हैं।

बन रहें बंगले महल परिवार अपने बट रहें हैं।

एक दिन आयेगा ऐसा, पक्षी न होंगे चमन में।

वृक्ष अब कम हो रहे,,,,,,

वृक्ष कम हो जायेंगे, पानी न बरसेगा जमीं पर।

सिर्फ पानी के लिए,मानव ये तरसेगा जमीं पर।

जो विषेली गेस होगी,उनका घर होगा ज़मीं पर।

प्राण वायु के बिना, जीवन नहीं होगा जमीं पर।

जीव जंतु बिन हवा पानी नहीं, होंगे अमन में।

वृक्ष अब कम हो रहे,,,,,,,

जिंदगी का ख्याल करिए जिंदगानी को सजाओं।

इसलिए चेतो,लगाओ, वृक्ष खुद जीवन बचाओ।

प्रकृति को छोड़ो स्वयं पर,नष्ट न इसको कराओ।

बन सजग प्रहरी धरा के,नीतियां निर्मल बनाओ।

नर सभी कर लेगा,जो दृढ़ता से लेगा ठान मनमें।

वृक्ष अब कम हो रहे...!


 - सीताराम साहू'निर्मल'छतरपुर मप्र

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

Post a Comment

Previous Post Next Post