मां शारदा की पावन धरा मैहर में गूंजा साहित्य का स्वर
अखिल भारतीय कवि सम्मेलन रहा अलौकिक एवं भावविभोर करने वाला आयोजन
मैहर । मां शारदा की धार्मिक नगरी मैहर में साहित्य, संस्कृति और काव्य का अनुपम संगम देखने को मिला, जब महिला कल्याण समिति ढोरी बोकारो के सौजन्य से “कहानिका अखिल भारतीय कवि सम्मेलन” का भव्य आयोजन सम्पन्न हुआ। मां शारदा काव्य महारथी के तत्वावधान में आयोजित यह विराट साहित्यिक आयोजन 23 मई, शनिवार को ओमकार पैलेस में संपन्न हुआ, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से आए कवियों ने अपनी ओजस्वी, भावपूर्ण एवं रसपूर्ण प्रस्तुतियों से वातावरण को काव्यमय बना दिया।मां शारदा की वंदना, दीप प्रज्वलन एवं पुष्प अर्पण के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। उपस्थित अतिथियों एवं कवियों ने मां शारदा का पूजन-अर्चन कर साहित्यिक चेतना का संदेश दिया। इस अवसर पर मंचासीन मुख्य अतिथि श्री सत्यभान सिंह पटेल रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री देवेंद्र पटेल ने की।विशिष्ट अतिथियों में रवींद्र सिंह “मंजू सर”, इंद्रजीत सिंह सर, भारत प्रसाद प्रजापति एवं रमेश प्रसाद प्रजापति सहित पत्रकार साथी मुकेश श्रीवास्तव, श्री रामकुमार रजक के साथ मनोज चौरसिया, गणेश विश्वकर्मा आदि अनेक साहित्यप्रेमी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।कार्यक्रम में देशभर से आए कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से श्रृंगार, वीर, हास्य, करुण, भक्ति एवं राष्ट्रभक्ति सहित सभी रसों का अद्भुत समावेश प्रस्तुत किया।प्रमुख कवियों में सर्वश्री जगन्नाथ पाण्डेय, गायत्री पाण्डेय, भारत प्रसाद प्रजापति, राजेंद्र तिवारी “स्वदेश”, पाण्डेय चिदानंद, राजेश तिवारी बाँदा, इंद्रजीत तिवारी “निर्भीक”, श्याम कुमार भारती (बोकारो, झारखंड), सुरेश प्रसाद जायसवाल, डॉ. उमेश कुमार पाण्डेय, अंजू पाण्डेय, पूनम दुबे वीणा, ललित सिंह ठाकुर (छत्तीसगढ़) एवं विनय गुप्ता (छत्तीसगढ़) ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियों से श्रोताओं का मन मोह लिया।संपादक श्याम कुंवर भारती जी द्वारा स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत किया गया। वहीं मुख्य अतिथि सत्यभान सिंह पटेल जी ने अपने साहित्यिक उद्बोधन में कविता को समाज की आत्मा बताते हुए साहित्य के संरक्षण एवं संवर्धन की आवश्यकता पर बल दिया। वरिष्ठ पत्रकार रवींद्र सिंह “मंजू सर” ने कार्यक्रम को “अलौकिक एवं ऐतिहासिक” बताते हुए कहा कि मैहर की यह साहित्यिक संध्या लंबे समय तक स्मरणीय रहेगी।कार्यक्रम के दौरान सभी मंचासीन अतिथियों एवं कविगणों का माल्यार्पण, स्मृति चिन्ह, अंगवस्त्र, श्रीफल, पुष्प एवं सम्मान पत्र देकर भव्य सम्मान किया गया। मुख्य अतिथि द्वारा सभी साहित्यकारों, पत्रकारों एवं आयोजकों को मां शारदा की प्रसाद स्वरूप चुनरी ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। साथ ही काशी विद्यापीठ के कुल सचिव द्वारा भी सभी प्रतिभागियों को सम्मान पत्र एवं अंगवस्त्र प्रदान किए गए।काव्य पाठ का आरंभ मां शारदा की आराधना, गणेश वंदना तथा गंगा संवर्धन विषयक काव्य प्रस्तुति से हुआ। पूरे आयोजन के दौरान ओमकार पैलेस कविता की स्वर लहरियों से गुंजायमान रहा। अपराह्न 11 बजे से प्रारंभ हुआ यह कार्यक्रम सायं 5 बजे तक निरंतर चलता रहा, जिसमें बड़ी संख्या में उपस्थित काव्य प्रेमी श्रोताओं ने साहित्य रस का आनंद लिया।मंच संचालन आशा पाण्डेय जी ने अत्यंत प्रभावशाली एवं सरस शैली में किया। आयोजन समिति के सूत्रधार एवं संपादक श्री श्याम भारती जी ने कहा कि बोकारो झारखंड से मां शारदा की धरा पर आकर काव्य पाठ करना उनके लिए आध्यात्मिक एवं साहित्यिक सौभाग्य का विषय है। उन्होंने भविष्य में स्थानीय जनसहयोग एवं जनप्रतिनिधियों के सहयोग से इस आयोजन को और अधिक विशाल स्वरूप देने की बात कही।इस अवसर पर कविगणों द्वारा लिखित पुस्तकों का विमोचन भी मंचासीन अतिथियों के करकमलों द्वारा किया गया तथा पुस्तकों का वितरण उपस्थित साहित्यप्रेमियों के बीच किया गया। कार्यक्रम के अंत में अंजू दुबे जी ने सभी आगंतुकों, कवियों एवं अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ तथा पूरा परिसर “मैहर वाली शारदा माता की जय” और “भारत माता की जय” के उद्घोष से गूंज उठा।यह कवि सम्मेलन केवल एक साहित्यिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, साहित्य और सामाजिक समरसता का जीवंत उत्सव बनकर उपस्थित जनमानस के हृदय में अमिट छाप छोड़ गया।
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