प्रेरणादायक चिकित्सा घटना : सामूहिक चिकित्सा प्रयास का एक उदाहरण
इटारसी । दिनांक 12 अप्रैल को एक अत्यंत चुनौतीपूर्ण एवं प्रेरणादायक चिकित्सा घटना सामने आई। डॉ. रवि टिकारिया द्वारा गंभीर अवस्था में एक नवजात शिशु को वात्सल्य हॉस्पिटल में शिफ्ट किया गया, जो वेंटिलेटर सपोर्ट पर था।
डिलिवरी के तुरंत बाद नवजात शिशु की स्थिति अत्यंत गंभीर थी — न तो उसकी हृदय गति चल रही थी और न ही श्वास। ऐसी विषम परिस्थिति में डॉ. रवि टिकारिया द्वारा लगभग एक घंटे तक लगातार विशेष प्रयास एवं नवजात पुनर्जीवन (Neonatal Resuscitation) किया गया, जिसके फलस्वरूप बच्चे में जीवन के लक्षण पुनः दिखाई देने लगे।
मानवता और समर्पण का परिचय
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नवजात को तत्काल वात्सल्य हॉस्पिटल में वेंटिलेटर सपोर्ट हेतु शिफ्ट करना आवश्यक था। उस समय परिजनों के पास कोई वाहन उपलब्ध नहीं था, इसलिए डॉ. अनिकेत ने मानवता एवं संवेदनशीलता का परिचय देते हुए अपने निजी वाहन से, डॉ. रवि टिकारिया के साथ मिलकर, बच्चे को सुरक्षित रूप से अस्पताल तक पहुँचाया।
वात्सल्य हॉस्पिटल में नवजात शिशु को लगातार विशेषज्ञ निगरानी एवं वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया। धीरे-धीरे बच्चे के स्वास्थ्य में सुधार हुआ और लगभग 10–12 दिनों के उपचार के पश्चात उसे पूर्णतः स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। वर्तमान में बच्चा स्वस्थ है।
साथ ही इस मरीज का उपचार आयुष्मान योजना के तहत पूर्णतः निःशुल्क किया गया तथा मरीज के परिजनों को इलाज हेतु किसी प्रकार का आर्थिक भार वहन नहीं करना पड़ा।
समाज के लिए संदेश
यह घटना हम सभी के लिए एक प्रेरणा है कि जब चिकित्सक, स्वास्थ्यकर्मी एवं सहयोगी संस्थाएँ सामूहिक भावना और समर्पण के साथ कार्य करती हैं, तब असंभव प्रतीत होने वाली परिस्थितियों में भी जीवन बचाया जा सकता है।
साथ ही यह घटना उन सभी लोगों के लिए आत्ममंथन का विषय भी है, जो किसी भी जटिल परिस्थिति को समझे बिना चिकित्सकों को तत्काल लापरवाह घोषित कर देते हैं। चिकित्सा क्षेत्र में अनेक बार सीमित समय, गंभीर परिस्थितियाँ और निरंतर संघर्ष के बीच निर्णय लिए जाते हैं, जहाँ टीमवर्क, धैर्य और समर्पण ही सबसे बड़ी शक्ति बनते हैं।
.jpg)
