श्री रामचरितमानस की कथा अ मंगल को हरने वाली है--विवेकानंद महाराज
इटारसी । श्री द्वारकाधीश मंदिर तुलसी चौक में नव दिवसीय श्री राम कथा का भव्य आयोजन हो रहा है कथा यजमान अशोक गुप्ता एवं परिवार पटवा बाजार इटारसी है श्री रामचरितमानस की कथा का प्रारंभ विगत दिवस नर्मदा अंचल के जाने-माने प्रवचन कर्ता आचार्य नरेंद्र शास्त्री ने किया था। उनका स्वास्थ्य खराब होने के कारण भोपाल से प्रदेश के जाने-माने प्रवचन कर्ता श्री विवेकानंद महाराज ने रविवार से श्री रामचरितमानस के प्रवचन को विस्तार दिया। उन्होंने कहा कि श्री राम कथाअ मंगल को हरने वाली है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव के मना करने के बाद भी सती अपने पिता राजा दक्ष के यज्ञ में गई जबकि उनको उनके पति भगवान शिव को दक्ष ने आमंत्रित नहीं किया था यज्ञ परिसर में अपने पति का स्थान न होने पर उन्होंने यज्ञ के कुंड में स्वयं को जला दिया सती के योगाग्नि में जल जाने के बाद भगवान ने दक्ष से बदला लिया भगवान के गानों ने दक्ष प्रजापति का शीश काटकर उसको बकरे की गर्दन लगा दी। विवेकानंद जी ने कहा कि उधर दूसरी तरफ हिमाचल और मैना के यहां पार्वती का जन्म हुआ। जब पार्वती विवाह लायक हुई तब देवताओं ने भगवान शंकर से अनुरोध किया कि यही वह उचित समय है जब आप हिमाचल की पुत्री से विवाह करें भगवान नारद ने अपनी भूमिका निभाई पार्वती का विवाह भगवान शंकर के साथ तय हुआ विवेकानंद जी ने कहा कि भगवान शंकर की जो बारात निकली वैसी दुनिया में आज तक किसी की भी बरात नहीं निकली। भगवान शंकर की बारात में कोई बिना सर के चल रहा था कोई बिना हाथ पांव के चल रहा था कोई नर कंकाल चल रहा था और भगवान शिव के गले में भी मुंडो की माला थी। विवेकानंद जी ने कहा कि जब हिमाचल के द्वार पर बारात पहुंची तब माता मैना बहुत घबरा गई। परंतु पार्वती ने अपनी मां को समझाया और कहा कि जो मेरे कर्म में लिखा है वही मुझे मिला है आप किसी प्रकार की चिंता ना करें सभी प्रकार से मेरा भला होगा। हिमाचल ने बारात की अगवानी की। कई दिनों तक बारात रही पार्वती का विवाह भगवान भोलेनाथ के साथ किया गया तब से पार्वती का नया आवास कैलाश पर्वत हुआ। विवेकानंद जी ने कहा कि भगवान शंकर चाहते तो राजा महाराजा की पोशाक पहनकर जा सकते थे परंतु वे शमशान के वासी अपनी सही स्थिति छुपाना नहीं चाहते थे। सभी देवताओं ने प्रसन्न होकर भगवान शिव और पार्वती को आशीर्वाद दिया इस तरह शिव पार्वती विवाह संपन्न हुआ। कथा के प्रारंभ में यजमान अशोक गुप्ता एवं उनके परिवार ने व्यास पूजन किया एवं विवेकानंद जी का पुष्पहार से स्वागत किया।
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