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काव्य : राजनीति - दिनेश जैन राही , बांदकपुर


 

काव्य : 

राजनीति 


सत्य को शर्मशार करती है राजनीति,

ईमान को गुनाहगार बनाती है राजनीति।।


ऐलान करने वाले राम राज्य का सौदागर,

भोली जनता का मज़ाक़ बनाती है राजनीति।।


चापलूसी की बयार में मानवता को बहा दिया,

अत्याचार की सेज पर दबाकर सुला दिया।।


बात करते हैं भ्रष्टाचार मिटाने की ढोंगी,

भ्रष्टाचार को पालती, संभालती है राजनीति।।


सबका साथ सबका विकास का ढोंग करती है।

चंद सिक्कों में बरगलाकर करती है राजनीति।।


केवल खेला खेल ऐसा कि लोग बहक जाएं,

बेसुरे होकर जैसे खुद गाते हैं,सब वो गाएं।


ईमानदारी की खुले मंच से कसम खाने वाली।

खुलकर बेईमानी का नंगा नाच नाचती है राजनीति।।


ना इन्हें हमसे प्यार है, ना तुमसे प्यार है ना अपनापन।

केवल हड़पनीति, गुंडानीति ही हो गई है राजनीति।।


सगे भाई को भाई का दुश्मन बना देती है राजनीति।

सौहार्द भरी जिंदगी को नरक बनाती राजनीति।।


भारी मंहगाई के बोझ तले धीरे से दबाकर रख दिया"राही"।

जो मतलब की बात ना करें, मरवा देती है राजनीति।।


 -दिनेश जैन राही बांदकपुर जिला दमोह मध्य प्रदेश

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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