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फुरसत में समूह ने मनाया पर्यावरण दिवस


 

फुरसत में समूह ने मनाया पर्यावरण दिवस 

 जमशेदपुर। जमशेदपुर स्थित साहित्यिक समूह *फुरसत में* की वरिष्ठ महिला साहित्यकारों ने अत्यंत अनूठे ढंग से पर्यावरण दिवस मनाया।आनलाइन काव्य पाठ और अपने अपने स्थान पर एक पौधा या वृक्ष लगाते हुए उसकी फोटो पटल पर शेयर की।यह आयोजन एक सार्थक उद्देश्य की पूर्णता के  साथ सृजन को समर्पित किया गया था।अध्यक्ष पद्मा मिश्र की रचना पर्यावरण की भयावहता के साथ प्रकृति के सौंदर्य को आत्मसात करने की बात कहती है--

सांसों में कितना जहर घुला,आओ विष अमृत धार करें,धरती अपनी सागर अपना अपनी नदियां नव नीर भरी,उन्मुक्त हवा के पंखों पर आओ हम प्रकृति-श्रृंगार करें।

वरिष्ठ भावप्रवण संवेदनशील कवयित्री आनंद बाला शर्मा -- दी ने एक हायकू प्रस्तुत किया-

नव सृजन,

 हरी भरी धरती

,मोहती मन।आनंद बाला शर्मा जी हायकू रचनाओं में प्रवीण कवयित्री हैं।

छाया प्रसाद जी की रचना सार्थक सोच और  संवेदना कै के साथ पर्यावरणको समर्पित रही--

--जीवन दायिनी,प्राण दायिनी 

कल कल करती नदियां,

ईश्वर का वरदान प्रकृति है.।

अगली प्रस्तुति अनीता निधि-जी की थी ।एक सकारात्मकसोचके साथ आने वाली पीढियों के लिए भी पर्यावरण की सुरक्षा करने का सुंदर संदेश देती रचना ने सभी को प्रभावित किया।

 आप एक बीज बो दो,

कल बरगद बन जाऊंगा,

तुम्हारे बच्चों के लिए 

कल फिर से आ जाऊंगा।

पटना से शामिल किरण सिन्हा -जी ने अपनी कविता प्रस्तुत की-आंगन आंगन फूल खिले हों,

गली गली हरियाली हो

,थोडी धूप  थोडी बारिश हो.ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

बेबाक एवं कुशल अभिव्यक्ति के.साथ एक सुखद बदलाव का संकेत देती हुई सुस्मिता मिश्रा ने कहा-

-नहीं काटना है पेड पौधे,

ना करना है नदियों को दूषित, 

तभी बचेगी धरा सुरक्षित ।

संस्था की भावप्रवण कवयित्री वीणा पाण्डेय-की रचना थी -चलो हम भी 

पर्यावरण का संकल्प उठाते हैं,

आओ साथी एक पेड लगाते हैं।

सचमुच एक पेड लगाने का संकल्प लेना समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण व प्रेरक संदेश है।

वरिष्ठ कवयित्री सुधा अग्रवाल ने अपनी रचना में कतिपय हास्य का पुट देते हुए-अत्यंत  महत्वपूर्ण प्रश्न का समाधान चाहा है समाज से --

मृत्युलोक का बढता प्रदूषण

 अब देवताओ को भी 

कर रहा है चिंतित ।

मनीला कुमारी-

तप्त सरस धरा पर तरस खाकर ईश ने ...जीवनदायी मेघों की यह अद्भुत छटा सजायी।

कार्यक्रम की सफलतापूर्वक समाप्ति पर सभी कवयित्रियों को प्रशस्ति पत्र भी  मिले जो  आगामी मीटिंग में सभी को प्रदान किए जाएंगे।

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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