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विश्व रक्तदाता दिवस पर ऑनलाइन अंतरराष्ट्रीय साहित्य संवाद हुआ


 

विश्व रक्तदाता दिवस पर ऑनलाइन अंतरराष्ट्रीय साहित्य संवाद हुआ

रोहतक । विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा स्थापित कार्ल लैंडस्टेनर  के जन्म दिवस के अवसर पर प्रज्ञा  साहित्यिक मंच रोहतक शाखा ने एक भव्य विचार गोष्ठी  का आयोजन किया  जिसकी अध्यक्षता अमेरिका से आदरणीया दुर्गा सिन्हा जी ने की तथा इस गोष्ठी के मुख्य अतिथि आदरणीय डॉ. सत्यबीर सिंह निराला जी रहे । कार्यक्रम का संचालन पूर्व प्रोफेसर एमडीयू डॉ. अंजना गर्ग जी ने किया । आदरणीया अर्चना जी द्वारा माँ सरस्वती वंदना से आरम्भ हुए इस दिव्य कार्यक्रम में सर्वप्रथम स्वैच्छिक रक्तदान के भीष्मपितामह डॉ. मधुकांत जी ने रक्तदान विषय पर महत्वपूर्ण जानकारियाँ दीं । ततपश्चात् बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग अध्यक्ष आदरणीय डॉ. बाबूराम वर्मा जी ने रक्तदान विषय पर उनके द्वारा की जा रही शैक्षिक उपलब्धियों से सबको अवगत कराते हुए बताया कि इस वर्ष उनके विश्वविद्यालय में डॉ मधुकांत के रक्तदान साहित्य पर एक अनूठा शोधकार्य संपन्न हुआ है । युवा गीतकार जयसिंह जीत ने अपने गीत 'दानियों में सबसे ऊँचा नाम है , रक्त देना वीरता का काम है' से सबको प्रभावित किया । पुनीता सिंह जी ने कहा कि तुम्हारे रक्त की चंद बूंदों से किसी का जीवन बच जाए तो बेहतर है । सुरों की मलिका वंदना जी ने अपने गीत में कहा कि कर्मों में यह कर्म महान , रक्तदान रक्तदान रक्तदान । अर्चना जी ने अपने आदर्श मुक्तक 'फ़रिश्ता बन के निभा दे जो धर्म अपना , बसा दे घर किसी का बाँट के लहू अपना ।' से सबका ध्यान आकर्षित किया और ख़ूब वाहवाही लूटी । डॉ. मधुकांत जी ने रक्तदाता को माँ से भी ऊँचा दर्ज़ा देते हुए रक्तदान विषय पर अपनी उत्कृष्ट रचना बावला की दिव्य प्रस्तुति दी । कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. सत्यबीर सिंह निराला जी ने रक्तदान विषय पर अपने अमूल्य विचार प्रस्तुत करते हुए गीत प्रस्तुत किया कि बचानी चाहिए हमको किसी की जान जीवन में । चंडीगढ़ से वरिष्ठ पत्रकार व साहित्यकार प्रेम विज जी ने कहा कि “मेरे दोस्त खून को नफ़रत में क्यों बेच रहे हो” ।  डॉ अंजना गर्ग ने अपनी लघुकथा के माध्यम से सांप्रदायिक वैमनस्य को दूर करने का संदेश दिया।कार्यक्रम की अध्यक्षा आदरणीया दुर्गा सिन्हा जी ने अपने मुक्तक में कहा कि “दान से ज़िंदगी को बचा लीजिए , अपने जीवन से जीवन नया दीजिए ।”  उन्होंने  अपने उद्बोधन में सभी साहित्यकारों की रचनाओं पर विस्तार से टिप्पणी करी एवं उनको खूबसूरत रचनाएं पेश करने पर बधाई दी । अंत में डॉ अंजना गर्ग ने सभी साहित्यकारों का कार्यक्रम में शामिल होने पर आभार   प्रकट करते हुए इस परमार्थी साहित्यिक कार्यक्रम को समापन किया ।

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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