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पानी -- डॉ ब्रजभूषण मिश्र , भोपाल


 

पानी

रहिमन पानी राखिए

बिन पानी सब सून

पानी गये न ऊबरे

मोती ,मानुष,चून

  रहीम जी के इस दोहे को जीवन दर्शन जिसने बना लिया,उसने सच सार्थक जीवन जिया।चलिए आज पानी के साथ,आप,मेरे संग यात्रा कीजिये।आपने ये गीत सुना ही होगा ।

पानी रे पानी तेरा रंग कैसा

जिसमें मिला दो,दिखे उस जैसा

     हम पानी से बनें,निर्मल,सलिल,पारदर्शी,और जीवन के हर रंग में पानी की तरह घुलमिल कर उस रंग के हो जाएँ, उसे आत्मसात करें,श्रमिक बनें तो ये पानी,पसीने की बूंदों सा चमके,दर्द बाँटें तो आँसू में ढलके,उमंग, उत्साह में हों ,तो आँखों मे इसकी चमक हो,प्रसन्न हों या भावविव्हल हों तो दो बून्द बन आंखों से ढलके।मतलब पानी का साथ न छूटे,चाहे आपसे या आप दुनिया से रूठें।पानी का जीवन भर साथ है।प्यास में पानी,भूख में पानी,भोजन में पानी,पानी कहाँ नहीं ।

पानी की अपनी कहानी है

इसकी अपनी रवानी है

नदी,झरने,जलप्रपात इससे

जीवन है,ये जवानी है

जल है तो जीवन है

जल है तो खेत ,वन हैं

बागियों की हरियाली में

फूलों व फलों का यही धन है

पानी सुख है,सम्मान है

सौंदर्य है,सब की जान है

गोरी की आंखों की चमक में है

अश्रु में, होता ये शक्तिमान है 

     गोरी के गाल पे ठहरा पानी,जुल्फों से टपकता पानी,हरे पत्तों पर बूंदों सा पानी,ठन्डे दिनों में दूब की नोंको पर पानी

चिड़ियों के फड़फड़ाने से पंख से उड़ता पानी,शीशे पर ठहरा पानी,जहाँ अनुपम सौंदर्य की छटा बिखेरते हैं वहीं सूखा पड़ने पर,कुंए के तल को टटोलता पानी,सूखे नलों से बून्द भर टपकता पानी,नदी के तल में बहने को तरसता पानी,खेतों में मिट्टी में दरार बन सूखता पानी,भूखे बच्चे के आँसू बनता पानी,चोट में आंखों से उभरता पानी,करुण हृदय में निर्धन,लाचार को देख,विवशता में आंखों से न बह सकता पानी।

माँ, बहनों के सम्मान के चोटिल,आघात के आँसू

क्या क्या देखे मन।

हर्ष में,मिलन में आँसू, विदाई ,जुदाई में आंसू

विवशता देख,आँखे पानी पानी हो जाती हैं ।

 आइए इस यात्रा के दृश्यों को समेटता हूँ, अपेक्षा करें कि हम,अपने पानी जैसे सम्मान को बचाये रखें,जिन्दगी को पानी पानी होने से बचाएं,और पानी की रक्षा करते हुए ,जीवन की नदिया को बहने दें क्योंकि -

संसार है एक नदिया

सुख दुःख दो किनारे हैं

ना जाने कहाँ जायें

हम बहते धारे हैं। 

- डॉ ब्रजभूषण मिश्र , भोपाल


देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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