काव्य :
बुजुर्गों का अनुभव और सीख
हमारे बुजुर्गों का अनुभव और सीख,
हमारी अनमोल धरोहर है।
मत करो अवहेलना बुजुर्गों की,
आज उनकी जरूरत हर घर घर है।
जो सिखाते कैसे करना बड़ों का आदर।
जो सिखाते कैसे करना छोटों को प्यार।
कैसे समाज में मिलकर रहना कैसे करना व्यवहार।
सच्चाई की राह पर चलने से,होगा जीवन में उद्धार।
बच्चों के साथ बच्चे बन जाते,बच्चों की खुशी में रम जाते।
उनकी पसंद के ही खेल खेलते,बच्चों की खुशी में घोड़ा तक बन जाते।
देशभक्ति की मिठी बातें करते, वीरता की कहानियाँ सुनाते।
कैसे जीवन में आगे बढ़ना, कामयाबी की तरकीब बताते।
आज जमाना बदल रहा है,कम हो रही है कद्र बुजुर्गों की।
नही चाहिए घर में बुजुर्ग कोई,,बदल रही है सोच लोगों की।
जो कर रहे तिरस्कार बुजुर्गों का,उनका भी एक दिन आना है।
जैसी करनी वैसी भरनी मुथा, फिर अंत समय तो पछताना है।
कवि छगनलाल- मुथा-सान्डेराव ,मुम्बई
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