मिट्टियों की महक से आसमान छूते सितारे, इटारसी के आंगन में 'स्वर्ण-नक्षत्रों' का मेला
अपने हीरोज को पलकों पर बिठाया इटारसी ने, कई संस्थाओं ने सम्मान दिया
इटारसी। कहते हैं जब इरादे फौलाद के हों और पैरों में लगन के घुंघरू बंधे हों, तो अभावों की बंजर जमीन से भी कामयाबी की फसल लहलहा उठती है। कुछ ऐसा ही मंजर तब देखने को मिला, जब खेल की धरा इटारसी ने अपनी चार नायाब खेल प्रतिभाओं को पलकों पर बिठाया। सूरजगंज चौराहे से जब खुली जीप में सवार होकर एशिया कप के नायक अंश बहुत्रा, गाजी खान, कांस्य पदक विजेता महक परिहार और अंतरराष्ट्रीय अंपायर रवि हरदुआ का विजय जुलूस निकला, तो ऐसा लगा मानो पूरा शहर ही खुशी में झूम उठा हो।
सरला मंगल भवन में आयोजित समारोह के मंच पर संघ के मार्गदर्शक एससी लाल, डॉ. अतुल सेठा, अध्यक्ष राजेंद्र तोमर, अम्पायर रवि हरदुआ, सचिव साजिद मलिक, उपाध्यक्ष अश्वनी वर्मा और सर्वजीत सिंह सैनी जैसे दिग्गजों की मौजूदगी ने इस शाम को और भी ऐतिहासिक बना दिया।
दिग्गजों का संदेश: जमीन पर पैर, आसमान पर नजर
समारोह में विचारों का एक ऐसा दार्शनिक प्रवाह बहा, जिसने बच्चों की लगन को नई दिशा दी। एससी लाल ने प्रेरित करते हुए कहा कि इतनी कम उम्र में बड़ी सफलता गौरव की बात है, बस मैदान में हमेशा रुचि, मेहनत और लक्ष्य लेकर उतरें। डॉ. अतुल सेठा ने इस पल को बड़ी शुरुआत बताते हुए कहा, सफलता को दिमाग पर नहीं बिठाना है, अभी लंबा सफर बाकी है। बचपन से खेल को जीने वाले राजेंद्र तोमर ने गांधी मैदान में और बेहतर सुविधाओं की वकालत की।
दीपक अग्रवाल,व्यापार महासंघ ने मोबाइल के इस दौर में विपरीत परिस्थितियों को मात देने वाले इन बच्चों की तारीफ की और शहर के लिए एस्ट्रोटर्फ की जरूरत बताई। वहीं कन्हैया गुरयानी ने गर्व से कहा कि महक परिहार संभाग से देश का प्रतिनिधित्व करने वाली पहली बिटिया बनी है। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष पंकज राठौर का दर्द और उम्मीद दोनों छलके, उन्होंने कहा कि साधारण मैदान से जब विवेक सागर और गाजी जैसे सितारे निकल सकते हैं, तो सुविधाएं मिलने पर हम देश को आधी हॉकी टीम दे सकते हैं। पूर्व पार्षद यज्ञदत्त गौर ने साल 2028 में यहीं से ओलंपियन निकालने का संकल्प दोहराया, तो मयूर जायसवाल ने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर टर्फ के लिए प्रयास करने का वादा किया। अंत में, विजय बाबू चौधरी, उन्नत किसान ने एक सुंदर दार्शनिक बात कही कि 'अनुकूल मौसम में तो फसल हर कोई अच्छी उगा लेता है, कमाल तब है जब विपरीत परिस्थितियों में भी कामयाबी की ऐसी सुनहरी फसल काटी जाए।Ó
जब खेल के रंग में रंगा पूरा समाज
खिलाड़ी महक परिहार और गाजी खान ने भावुक होकर अपनी इस सफलता का श्रेय अपने कोच, परिवार और डीएचए को दिया। राजनीति और मतभेदों की सीमाओं से परे, इस ऐतिहासिक क्षण की गवाह शहर की वे तमाम संस्थाएं बनीं जिन्होंने इन हीरों का आत्मीय अभिनंदन किया।
इन्होंने किया अभिनंदन
समारोह में संयुक्त व्यापार महासंघ, अंजुमन कमेटी, नोबल कम्प्यूटर सर्विसेज, केमिस्ट संघ, अधिवक्ता संघ, पूज्य पंचायत सिंधी समाज, नर्मदांचल कान्यकुब्ज ब्राह्मण समाज, अखंड राजपूताना सेवा समिति, जिला फुटबाल संघ, जिला कुर्मी क्षत्रिय समाज, युवा कांग्रेस, लक्ष्य क्रिकेट अकादमी, मप्र मुस्लिम विकास परिषद, झूलण सेवा समिति, अपनी इटारसी ग्रुप, फाइटर फुटबॉल क्लब और आनंद पब्लिक स्कूल जैसी करीब डेढ़ दर्जन संस्थाओं ने स्मृति चिह्न और शॉल से खिलाडिय़ों का सम्मान किया। कार्यक्रम का शानदार संचालन हिमांशु बाबू अग्रवाल ने और आभार प्रदर्शन साजिद मलिक ने किया।
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