नपा अध्यक्ष के घर पहुंचे खाली बाल्टी, मग और साबुनदानी लेकर पहुंचे पार्षद अमित कापरे
इटारसी ।।शहर का कोई मुद्दा हो या अपने वार्ड की कोई समस्या। जनता की आवाज को अपने निराले अंदाज में जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाने में माहिर नगर पालिका वार्ड 16 के पार्षद अमित कापरे एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार मामला था शहर और उनके वार्ड के पेयजल आपूर्ति की किल्लत का। कांग्रेस के उन साथी पार्षदों और पार्षद प्रतिनिधियों के साथ जहां पानी की अधिक समस्या थी कापरे ने खाली बाल्टी, मग और साबूनदानी लेकर नगर पालिका अध्यक्ष के घर के सामने आज सुबह धरना दिया। नगर पालिका की कार्य प्रणाली से खिन्न कापरे का प्रदर्शन शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है।
*नगर पालिका पर लगाया भ्रष्टाचार के आरोप।*
प्रदर्शन के दौरान कापरे ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि 7 अप्रैल को नगर पालिका के साधारण व्यापक सम्मेलन में शहर में पानी टैंकरों के माध्यम से जलापूर्ति सुनिश्चित किए जाने हेतु 20 लाख रूपए स्वीकृत हुए थे। दो माह बीतने के बाद भी योजना को अमल में नहीं लाया गया। गर्मी अपने अंतिम चरण में है और कभी भी मानसून आ सकता है।
पार्षद अमित कापरे ने बताया कि करीब दो दशक से नगर पालिका से उनकी इस समस्या को लेकर लड़ाई चल रही है। बीते वर्षों में चार अध्यक्ष और छः मुख्य नगर पालिका अधिकारी आए और चले गए। लेकिन अभी भी हालात जस के तस है। उन्होंने आरोप लगाया कि जलावर्धन, अमृत योजना, घर-घर नल घर घर जल सहित जितनी भी योजनाएं हैं यह वर्तमान सरकार की विफलता के जीते जागते स्मारक है। कोई ठोस या सारगर्भित परिणाम आज तक देखने में नहीं आया।
*पार्षद एमपीईबी पर भी बरसे।*
कापरे ने विद्युत वितरण कंपनी को भी आड़े हाथों लिया एवं तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विद्युत वितरण कंपनी और नगर पालिका दोनों ही आम जनमानस को फुटबॉल समझते हैं। जब पानी आता है तब लाइट नहीं रहती है और जब लाइट रहती है तब या तो मोटर जल जाती है या कहीं की पाइपलाइन फट जाती है। टैंकर वाले शराब पीकर गाड़ी चलाते हैं तो जगह जगह लड़ाइयां होती हैं।
*नगर पालिका कर रही पक्षपात।*
कापरे ने प्रेस को बताया कि हमारे साथी पार्षदों ने अपनी जेब के खर्चे से पूरे शहर के लिए मुफ्त पानी सप्लाई के लिए टैंकरों की व्यवस्था की थी लेकिन नगरपालिका पानी तक नहीं दे पा रही। रात को 10:00 बजे बोरवेल बंद कर दिया जाता है। उन्होंने बताया कि बीते कई दिनों से वे स्वयं कभी 2 हज़ार तो कभी 3 हजार रुपए रोज पानी के टैंकरों पर खर्च कर रहे है।
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