ad

भगवान की परीक्षा न लेकर उनकी प्रतीक्षा करो-विवेकानंद महाराज


 

भगवान की परीक्षा न लेकर उनकी प्रतीक्षा करो-विवेकानंद महाराज

इटारसी ।  श्री द्वारकाधीश बड़ा मंदिर तुलसी चौक में अधिक मास की चतुर्थ और अंतिम श्री रामचरितमानस की कथा चल रही है मध्य प्रदेश के जाने-माने प्रवचन कर्ता  श्री विवेकानंद महाराज भोपाल के द्वारा श्री रामचरितमानस पर प्रवचन दिए जा रहे हैं। कथा के यजमान श्री अशोक गुप्ता एवं परिवार के द्वारा रामचरितमानस का पूजन किया गया एवं विवेकानंद महाराज का  पुष्पहार से स्वागत किया गया।कथा के तीसरे दिन प्रवचन को विस्तार देते हुए विवेकानंद महाराज ने कहा कि भगवान परीक्षा नहीं लेकर  उनकी प्रतीक्षा करो। उन्होंने कहा की रामचरितमानस में दो अवसर ऐसे आए जब प्रभु को पहचाने में गलती की।सती  एवम सुग्रीव राम को नही पहचान पाए। विवेकानंद ने कहा कि भगवान भोलेनाथ सभी पर कृपा करते हैं उनका विवाह पार्वती के साथ हुआ। विवाह  के पश्चात हिमाचल की पत्नी  मैना आरती की थाली छोड़कर भाग गई। शिवजी जनमासे में जाकर बैठ गए। मैना ने नारद मुनि को बहुत भला बुरा कहा। नारद ने नैना को समझाया कि पार्वती पूर्व जन्म की सती है तब जाकर मैना को समझ आया और उन्होंने भगवान शिव की आरती की। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को पीछे छुपाना चाहिए हर अच्छे कार्य के लिए ईश्वर को धन्यवाद देना चाहिए। विवेकानंद महाराज ने की कथा सुनाई। और बताया कि किस तरह  नारद मुनि ने भगवान के सामने विवाह की बात रखी। ओर कहा कि उनको भगवान अपना रूप दे देवे। भगवान ने कहा ऐसा ही होगा और  नारद को बन्दर का रूप दे दिया। स्वयंवर में विश्व मोहनी ने भगवान का ही वर्णन किया। नारद ने  भगवान को श्राप दिया वह तुमने मेरे साथ किया है तुम भी पत्नी के  वियोग में परेशान रहोगे। आगे जाकर नारद का श्राप सही साबित हुआ। पर यह सब भगवान की लीला थी।

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

Post a Comment

Previous Post Next Post