आचार्य समय सागर जी महाराज का इटारसी में पहला कदम आज : हाथी-घोड़े, ऊंट और अखाड़े के साथ निकलेगी भव्य अगवानी यात्रा; भोपाल-नर्मदापुरम समेत 9 शहरों का जैन समाज होगा शामिल
इटारसी। नगर के इतिहास में रविवार, 12 जुलाई को एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है। जैन समाज के सर्वोच्च संत, परम पूज्य परम्पराचार्य 108 श्री समय सागर जी महाराज का पहली बार इटारसी नगर में मंगल आगमन हो रहा है। आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के सल्लेखना विधि से देह त्याग होने के बाद दिगम्बर जैन परंपरा की कमान संभाल रहे आचार्य समय सागर जी की अगवानी के लिए नगर के मुख्य मार्ग को सजाया गया है।
इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिए इटारसी समेत मध्य प्रदेश के कई शहरों से हजारों श्रद्धालु जुटेंगे।
दोपहर 2 बजे एसबीआई चौराहे पर अगवानी :
रविवार दोपहर 2:00 बजे पुरानी इटारसी के एसबीआई चौराहे पर समस्त जैन समाज और नगरवासी एकत्रित होंगे। यहीं से आचार्य श्री ससंघ की भव्य अगवानी और शोभायात्रा की शुरुआत होगी। यात्रा में सुरक्षा और व्यवस्था के लिए विशेष वालंटियर तैनात किए गए हैं।
शोभायात्रा में 11 घोड़े, 2 ऊंट और बजरंग अखाड़ा बढ़ाएंगे रौनक
आचार्य श्री के स्वागत में निकलने वाली शोभायात्रा बेहद भव्य होगी।
अश्व, ऊंट और हाथी पर लहराएगी ध्वजा :
सबसे आगे बैंड सुरों की तान बिखेरेगा। इसके पीछे ध्वजा लिए 11 अश्व (घोड़े), 2 ऊंट और 1 हाथी चलेंगे।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियां:
बच्चों की 5 टोली विशेष अभिनय (फैंसी ड्रेस/नाटक) करते हुए चलेगी। साथ ही आचार्य श्री के जीवन और प्रकल्पों पर आधारित 5 बग्गी झांकियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी।
शौर्य और भक्ति:
बजरंग अखाड़ा के जांबाज अपने करतब दिखाएंगे। सिलवानी नगर का 'दिव्य घोष' और अष्ट मंगल लिए अष्ट कुमारियां अगवानी करेंगी।
ससंघ का आशीर्वाद:
मुख्य शोभायात्रा में परम पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज ससंघ और आर्यिका मां भावनामति माताजी ससंघ के मंगल कदम होंगे।
7 महिला मंडल और सर्व समाज :
शांतिनाथ, आदिनाथ, पार्श्वनाथ, महावीर जिनालय, श्वेतांबर श्री संघ, तारण तरण चैत्यालय और हिंदू समाज संगठन के महिला मंडल पारंपरिक वेशभूषा में मंगल कलश लेकर चलेंगे।
भोपाल से पचमढ़ी तक... 8 शहरों का जैन समाज पहुंचा इटारसी
आचार्य श्री के दर्शनों के लिए केवल इटारसी ही नहीं, बल्कि आसपास के कई जिलों का जैन समाज इटारसी पहुंच चुका है। शोभायात्रा में मुख्य रूप से शामिल होने वाली बाहरी समाज इस प्रकार है:
भोपाल दिगम्बर जैन समाज: 6 विशेष ढोल और भारी जनसमुदाय के साथ।
नर्मदापुरम (होशंगाबाद) समाज
औबेदुल्लागंज और मंडीदीप समाज
बुधनी और नसरूल्लागंज समाज
बाबई और पचमढ़ी समाज
आचार्य विद्यासागर जी के सगे भाई हैं समय सागर जी महाराज :
आचार्य समयसागर जी का जन्म 27 अक्टूबर 1958 (शरद पूर्णिमा) को कर्नाटक के सदलगा (बेलगाम) में हुआ था। गृहस्थ जीवन में उनका नाम 'महावीर' था। वे राष्ट्रसंत आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के सगे छोटे भाई हैं।
विद्यासागर जी के प्रथम शिष्य:
मात्र 17 साल की उम्र में 1975 को उन्होंने आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत लिया। इसके बाद 8 मार्च 1980 को छतरपुर के द्रोणगिरि सिद्धक्षेत्र में आचार्य विद्यासागर जी से मुनि दीक्षा ली। वे आचार्य श्री के प्रथम दीक्षित शिष्य हैं।
संभाली परंपरा की कमान : आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के समाधिलीन होने के बाद, उन्हें जैन समाज की इस महान परंपरा का प्रमुख नियुक्त किया गया। वर्तमान में वे पूरे देश में दिगम्बर जैन परंपरा का कुशल नेतृत्व कर रहे हैं।
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