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काव्य : आखिर कब तक - सरोज लता सोनी , भोपाल



काव्य : 

आखिर कब तक

विषय  भोग की नहीं थी वस्तु,
वह तो नन्हीं  खिली कली थी।
मात-पिता के  लाड़- प्यार में,
 वह नाजों से पली बढ़ी थी ।।

पर छीन लिया था बचपन उसका,
और सुंदर सपनों का  संसार।
बहसी दरिंदों ने निर्ममता से,
किया  निकृष्ठ  था दुराचार ।।

मिटती रही अस्मिता  उसकी,
मौन  रहा था यह संसार ।
 रही सिसकती जिंदगी उसकी,
हुई मानवता भी शर्मसार।।

 करती रही संघर्ष मौत से, 
फिर छोड़ दिया  उसने संसार।
पर सूनी आंखों में उसके,
 प्रश्न खड़े थे कई हजार।।

क्यों करते धर्म- कर्म दिखावा,
 कन्या-भोजन और  अनुष्ठान। 
अपनी सभ्यता और संस्कृति ,
को क्यों करते हो बदनाम।

क्या नहीं किसी से बहन का नाता?
 नहीं माँ की  गरिमा की पहचान ?
कहते तो  सब नारी देवी है, 
फिर क्यों करते  हो अपमान।।

आखिर कब तक न्याय मिलेगा, 
और नारी को सब अधिकार।
जब  मिलेगी फाँसी
हैवानों को,
तब  मानवता लेगी विस्तार।

 - सरोज लता सोनी , भोपाल

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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