ad

काव्य : चिंता की चिता जलाने दे - उपमेंद्र सक्सेना, एडवोकेट , बरेली



काव्य : 

चिंता की चिता जलाने दे

 गीत✍🏻

मत रोक मुझे अब जाने दे
पटियाला पैग लगाने दे। 

दिए वक्त ने खूब थपेड़े
किस्मत का मैं मारा हूँ
घोर अभावोंं के साए में
दाँव आस का हारा हूँ

चिंता की चिता जलाने दे
पटियाला पैग लगाने दे। 

जाने कितने मजदूरों ने
तुच्छ नज़र की घात सही
काम बड़ा कब छोटा होता
बस कहने की बात रही

निंदा को धूल चटाने दे
पटियाला पैग लगाने दे। 

अपशब्द बेबसी झेल रही
थका दिया है जीवन ने
अवसादों  की पीर बढ़ाई
चकाचौंध की उलझन ने

कुंठा का गला दबाने दे
पटियाला पैग लगाने दे। 

मिले हौसला और तसल्ली
पिए सुरा का जो प्याला
स्वाभिमान को श्वासें देकर
जिंदा रखती मधुशाला

पीने दे और पिलाने  दे
पटियाला पैग लगाने दे। 

- उपमेंद्र सक्सेना,  एडवोकेट
'कुमुद- निवास', बरेली 
 मोबा.- 9837 94418 7
देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

Post a Comment

Previous Post Next Post