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सत्य प्रेमकथा 'दो संस्कृतियों का मधुर मिलन' पर ऑनलाइन पुस्तक-चर्चा आयोजित



सत्य प्रेमकथा 'दो संस्कृतियों का मधुर मिलन' पर ऑनलाइन पुस्तक-चर्चा आयोजित

रोहतक । प्रज्ञा साहित्यिक मंच एवं प्रेरणा शोध संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में सत्य प्रेमकथा पर आधारित पुस्तक 'दो संस्कृतियों का मधुर मिलन' पर एक ऑनलाइन पुस्तक-चर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि इसमें पुस्तक के लेखक, समीक्षकों तथा वास्तविक जीवन के पात्रों एवं उनके परिवारजनों ने सहभागिता कर अपने अनुभव साझा किए। इस कारण यह चर्चा केवल साहित्यिक विमर्श न रहकर एक जीवंत सामाजिक संवाद बन गई।

प्रज्ञा साहित्यिक मंच के संरक्षक, प्रेरणा शोध संस्थान के संस्थापक एवं पुस्तक के लेखक डॉ. जयभगवान सिंगला ने पुस्तक की रचना-प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह कृति केवल एक प्रेमकथा नहीं, बल्कि विश्वास, धैर्य, पारिवारिक संवाद और मानवीय संवेदनाओं की सच्ची यात्रा है। उन्होंने कहा कि समाज में जाति और धर्म की दीवारों से ऊपर उठकर यदि रिश्तों को मानवीय मूल्यों के आधार पर स्वीकार किया जाए तो अनेक परिवार टूटने के बजाय और अधिक सशक्त बन सकते हैं।

प्रज्ञा साहित्यिक मंच के अध्यक्ष डॉ. मधुकांत तथा प्रो. बाबूराम, विभागाध्यक्ष, हिंदी विभाग, बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय, रोहतक ने समीक्षक के रूप में पुस्तक का विश्लेषण करते हुए कहा कि यह रचना यथार्थ जीवन से निकली हुई ऐसी प्रेरक प्रेमकथा है, जो पाठकों को आरंभ से अंत तक बाँधे रखती है। इसमें दो संस्कृतियों और दो परिवारों के बीच संवाद, विश्वास, सहिष्णुता और स्वीकार्यता का अत्यंत सहज एवं मार्मिक चित्रण किया गया है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक विशेष रूप से युवाओं और अभिभावकों को सकारात्मक सोच तथा परिपक्व निर्णय लेने की प्रेरणा देती है।

प्रज्ञा साहित्यिक मंच की सचिव डॉ. अंजना गर्ग ने कार्यक्रम का सफल संचालन, संयोजन एवं संपादन किया। उन्होंने कहा कि यह कृति युवाओं और अभिभावकों दोनों को यह संदेश देती है कि जीवन के महत्वपूर्ण निर्णय आवेश या जल्दबाज़ी में नहीं, बल्कि आपसी विश्वास, समझदारी, पारिवारिक सहमति और मानवीय मूल्यों को ध्यान में रखकर लेने चाहिए।

चर्चा में पुस्तक के वास्तविक पात्र शिवम के माता-पिता डॉ. अनिल सिंगला एवं श्रीमती किरण सिंगला, उनकी मौसी श्रीमती आशा सिंगला, तथा एंजेला की माता श्रीमती लिज़ी (Lizy) और पिता श्री सेबास्टियन (Sebastian) ने भाग लेकर अंतरधार्मिक विवाह से जुड़ी प्रारंभिक आशंकाओं, सामाजिक चुनौतियों तथा बाद में दोनों परिवारों के बीच स्थापित विश्वास, अपनत्व और आत्मीयता के अनुभव साझा किए।

शिवम की भाभियों नेहल सिंगला (इंग्लैंड) तथा शिल्पा सिंगला (कुरुक्षेत्र) ने भी अपने विचार व्यक्त किए। नेहल सिंगला ने कहा कि इंग्लैंड जैसे बहुसांस्कृतिक परिवेश में विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों के लोगों के साथ रहना जीवन का सामान्य हिस्सा है। उनके घर में ईसा मसीह का चित्र भी स्थापित है, इसलिए एंजेला के परिवार से रिश्ता बनने पर उन्हें कभी किसी प्रकार का धार्मिक या सांस्कृतिक अंतर महसूस नहीं हुआ। वहीं शिल्पा सिंगला ने कहा कि एंजेला से मिलकर कभी यह अनुभव नहीं हुआ कि वह किसी दूसरे धर्म से हैं। उन्होंने भारतीय संस्कृति, पारिवारिक परंपराओं, पूजा-पद्धति तथा हमारे देवी-देवताओं के इतिहास और मान्यताओं के प्रति गहरा सम्मान और अच्छी जानकारी का परिचय दिया। कई अवसरों पर उनकी जानकारी हमसे भी अधिक लगी। दोनों ने कहा कि किसी भी रिश्ते की वास्तविक पहचान धर्म नहीं, बल्कि प्रेम, सम्मान, संस्कार और पारस्परिक समझ होती है।

वक्ताओं ने कहा कि यदि बच्चों का प्रेम सच्चा हो, परिवार संस्कारी हों और आपसी सम्मान बना रहे, तो जाति और धर्म रिश्तों के बीच दीवार नहीं बनने चाहिए। इस पुस्तक और चर्चा ने समाज, विशेषकर युवाओं एवं अभिभावकों, को संवाद, सहिष्णुता, सामाजिक समरसता और पारिवारिक सौहार्द का सशक्त संदेश दिया।

कार्यक्रम का प्रसारण 'शब्दों की खुशबू' यूट्यूब चैनल के माध्यम से किया गया। अंत में डॉ. अंजना गर्ग ने सभी प्रतिभागियों एवं दर्शकों का आभार व्यक्त किया।
देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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