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काव्य : हम भारत माँ के लाल हैं - छगनलाल मुथा-सान्डेराव , मुम्बई



काव्य : 

हम भारत माँ के लाल हैं

हम भारत माँ के लाल है,अब नहीं किसी के गुलाम हैं।
जो शहीद हुए हैं देश की खातिर,उन वीरों को सलाम हैं।

कई शहीदों ने कुर्बानी देकर, ये अनमोल आजादी पाई हैं।
इंकलाब जिन्दाबाद कहकर,हँसते - हंँसते फांँसी खाई हैं।

उन मांँ के प्यारे लालो की यादें,दिल में बसाकर रखना हैं।
देश में  छिपे गद्दारों से अपने,वतन को बचाकर रखना हैं।

सबसे सुनहरा दिन ऐतिहासिक,१५अगस्त १९४७आजादी का।
लाल किले से फहराया तिरंगा, तोड़ा जंजीर गुलामी का।

दोस्ती का कोई हाथ बढ़ाए, उसे गले लगा ही लेना है।
अगर कोई आंँख दिखाएं, उसे मजा चखा ही देना हैं।

हम कितने ख़ुशनसीब है, हम आजाद भारत के वासी हैं।
हम सत्य अहिंसा के पुजारी , हम सच्चे हिंदुस्तानी हैं।

हम हिंद के सैनिक हैं,नहीं किसी से 'मुथा' डरना हैं।
सदा आजाद रहे वतन हमारा,यही संकल्प करना हैं।

- कवि छगनलाल मुथा-सान्डेराव , मुम्बई
देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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