काव्य :
आजादी अनमोल बड़ी
आजादी अनमोल बड़ी, खोने मत देना इसको,
ताक में खड़ा शत्रु सदा, सहेज कर रखना इसको ।
आज को अभी संवारना, विपत्तियों से न हारना,
दुश्मन को शीघ्र मारना, शत्रु को जल्दी पछाड़ना,
ये कलयुगी जमाना है, झूठ का बोलबाला है,
सच्चाई ने ज़ख्म है सहें, अब आगे और क्या कहें,
उलझकर मोह-माया में, लूटने न देना इसको,
आजादी अनमोल बड़ी, खोने मत देना इसको ।
खून की बही थी नदियॉं, बीती थी लाखों सदियां,
वीरों ने दी कुर्बानियॉं, न्यौछावर की जवानियॉं,
विपदाओं से जंग लड़ी, चोट खाई थी बहुत बड़ी,
बिखरते गए आह न की, मिटने की परवाह न की,
ताकि तुम स्वतंत्र जी सको, अपने सब ख्वाब सी सको,
आजादी अनमोल बड़ी, खोने मत देना इसको ।
सभी देशहित भूल गए, अधंकार की ओर गए,
लड़ें युवा बूढ़े बच्चे, जाति-पाति का स्वांग रचे,
आज चलन है नया चला, ये जीवन स्वार्थ में पला,
उथल-पुथल भारी भरकम, देते मॉं को दुख हरदम,
भारत को स्वतंत्र रहने दो, क्यों दुःखी करना इसको,
आजादी अनमोल बड़ी, खोने मत देना इसको ।
कैसे कर्ज चुकाओगे, कैसे मुॅंह दिखलाओगे,
थोड़ा इस पर गौर करों, गलत चाल से जरा डरों,
कानाफूसी में अटके, तभी राह से हो भटके,
याद करों कर्तव्य अपना, अखण्ड भारत है अपना,
ये मातृभूमि है अपनी, नव "आनंद" देना इसको,
आजादी अनमोल बड़ी, खोने मत देना इसको ।
- मोनिका डागा “आनंद", चेन्नई
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