ad

मंदसौर में अ.भा. साहित्य परिषद की पावस काव्य गोष्ठी सम्पन्न


मंदसौर में अ.भा. साहित्य परिषद की पावस काव्य गोष्ठी सम्पन्न

‘‘तैयार खड़ी है बेटियों सी बूंदे अपने पीहर आने को
मानसून बन देश में बरस जाने को’’

मंदसौर से डॉ घनश्याम बटवाल की रिपोर्ट 

मंदसौर। अखिल भारतीय साहित्य परिषद मंदसौर इकाई की पावस काव्य गोष्ठी श्रीमती भगवती जोशी, श्रीमती चन्द्रकला भावसार, नंदकिशोर राठौर, राजेन्द्र तिवारी, विजय अग्निहोत्री, नरेन्द्र भावसार, प्रकाश कल्याणी, नरेन्द्र त्रिवेदी, सी.के. विश्नोई, सुरेन्द्र शर्मा की गरिमामय उपस्थिति में सम्पन्न हुई। गोल चौराहे स्थित हेमू कालानी प्रतिमा के पास मेडिपॉइंट सभागार में आयोजित काव्य गोष्ठी में विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे ।

इस अवसर पर मॉ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण दीप प्रज्वलित पश्चात सरस्वती वंदना श्रीमती हेमा सिंह ने एवं संगठन गीत ‘‘ भारती की लोकमंगल साधना साकार हो’’ नंदकिशोर नादान ने प्रस्तुत किया ।

पावस काव्य गोष्ठी में रचनाकारों ने श्रावण पूर्णिमा सावन मास वर्षा ऋतु रक्षाबंधन और प्रकृति केन्द्रित कविताएं प्रस्तुत की ।

इस अवसर पर साहित्य परिषद सचिव नंदकिशोर राठौर ने बताया कि सावन माह की  द्वितीय काव्य गोष्ठी है। जिसमें सावन की रिमझिम फुहार जैसी रचनाएं सुनने को मिल रही है। बरसात में बूंदों का सफर सागर से शुरू होता है। बादलों का संग और फिर मानसून के रूप में बरसने की उमंग ठीक उस बेटी के समान होती है जो बूंद बनकर धरती पर आई नदी बनकर सागर में मिली, सागर जो बूंदों का ससुराल है वे बूंदे सावन में जलवाष्प के रूप में भाई समान बादलों के साथ वापस अपने पीहर आती है और पीहर को हरा भरा एवं समुद्र करने के लिये बरस जाती है। उन्होंने इसी परिप्रेक्ष्य में अपनी कविता सुनाई की ‘‘तैयार खड़ी है बेटियों सी बूंदे, अपनी पीहर आने को, मानसून बन देश में बरस जाने को।’’ 
इस गोष्ठी में नरेन्द्र त्रिवेदी ने ‘‘शिवना तट पर पशुपति दशपुर की पहचान, अष्टमुखी महादेव है महिमा उनकी महान’’ सुनाया।

कवियत्री भगवती जोशी ने ‘‘मुझे ऐसा बना दो मेरे पिता, जीवन में न लगे ठोकर कभी’’, नरेन्द्र भावसार ने गीत कविता ‘‘ बिस्तर पे सलवटें रहने दो जरा, घर को घर रहने दो जरा’’ सुनाई। विजय अग्निहोत्री ने ‘‘सावन की बूंदे गिरी, हरियाली मुस्काय, सूनी धरती के अधर फिर से फूल खिलाय’’ गीत प्रस्तुत किया।

  राजेन्द्र तिवारी ने ‘‘मेरे पिया गये परदेश, याद उनकी आई’’ सुनाया। सुरेन्द्र शर्मा ने ‘‘गीत कुदरत का करिश्मा  तो देखो, सब भूल भूलईया है’’ सुनाया। चन्द्रकला भावसार ने ‘‘है जिंदगी कितनी खूबसूरत तुम्हें पता नहीं’’, हिमांशु वर्मा ने कविता ‘‘ आकाश से गिरती बारिश की बूंदें धरती पर आकर धरती को चूमे’’ सुनाई।
कार्यक्रम में प्रकाश कल्याणी, श्री चंद्र कुमार विश्नोई ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन नरेन्द्र त्रिवेदी ने किया एवं आभार नरेन्द्र भावसार ने माना।
अंत में परस्पर कवि साहित्यकारों ने श्रावण पूर्णिमा और रक्षाबंधन पर्व की बधाई दी ।
देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

Post a Comment

Previous Post Next Post