काव्य :
मज़ाक़ न बने परीक्षा
मज़ाक़ न बने परीक्षा
कीजे सम्यक समीक्षा
कैसे न लीक हो पर्चा ?
मिल बैठ करो चर्चा
छात्रों को दे दो माफ़ी
गुंडो को सज़ा काफी
सुरक्षा बलों पर हमले !
खामोश कैसे सहले !!
संविधान पथ है पावन
संसद पंचों का आंगन
दलदल से निकलो बाहर
जन बल के तुम्हीं नाहर
भारत तुम्हें निहारे
माँ भारती पुकारे
शांति अमन वरो रे
कुछ तो जतन करो रे
- चन्द्रभान 'चंदर,भोपाल
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