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सरोकार : 12 साल पहले शुरू हुआ ग्रीन इंडिया मिशन फैल : लक्ष्य की केवल 8 प्रतिशत ही उपलब्धि रही - डाॅ. चन्दर सोनाने, उज्जैन



सरोकार : 

12 साल पहले शुरू हुआ ग्रीन इंडिया मिशन फैल : लक्ष्य की केवल 8 प्रतिशत ही उपलब्धि रही

  -  डाॅ. चन्दर सोनाने, उज्जैन

         बरसात के मौसम में पौधे लगाओ, पर्यावरण बचाओ के नारे खूब बुलन्द होते हंै। किन्तु असल में वास्तविक धरातल पर हालात बिल्कुल उलट है। देश में साल 2012 में शुरू किए गए ग्रीन इंडिया मिशन की 12 साल बाद भी उपलब्धि मात्र 8 प्रतिशत रही ! यानी लक्ष्य का 92 प्रतिशत काम करना बाकी रहा। यह तस्वीर और हालात अत्यन्त निराशाजनक और चिन्तनीय है।
   कैग के देश में 16 राज्यों के आॅडिट में उक्त तथ्य सामने आया है। इस मिशन के अन्तर्गत देशभर में 14 लाख हेक्टेयर में वन आवरण की गुणवत्ता में सुधार का लक्ष्य तय किया गया। इसमें से 12 साल में केवल 1.1 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ही यह काम किया गया। अर्थात लक्ष्य का मात्र 8 प्रतिशत ही प्राप्ति की जा सकी। इसी प्रकार देश में इस मिशन के अन्तर्गत कार्बन सीक्वेस्टरेशन का आंकलन 16 राज्यों में से केवल 2 राज्यों मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ ने ही किया। बाकी राज्यों ने तो ध्यान ही नहीं दिया।
                      मध्यप्रदेश राज्य की हालत देखे तो यहां ग्रीन इंडिया मिशन के अन्तर्गत 2012 में 3,40,700 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधारोपण का लक्ष्य तय किया गया था। इसमें से मात्र 26,939 हेक्टेयर क्षेत्र में ही पौधारोपण किया गया। यानी यह लक्ष्य की 7.91 प्रतिशत ही उपलब्धि रही। अर्थात  92.09 प्रतिशत लक्ष्य की पूर्ति ही नहीं की जा सकी। मध्यप्रदेश में भी अन्य राज्यों की तरह पौधारोपण का बहुत हल्ला मचा। किन्तु वास्तविक स्थिति अत्यन्त गंभीर और चिंताजनक है।
   कैग ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि देश के 16 राज्यों में से सिर्फ 2 राज्यों मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में 2015-25 के दौरान कार्बन सीक्वेस्टरेशन का आकलन किया। कैग ने यह भी कहा कि 14 राज्यों ने कार्बन सीक्वेस्टरेशन का आकलन किया ही नहीं। इसलिए मिशन की जलवायु परिवर्तन पर वास्तविक असर मापा ही नहीं जा सका।
इस ग्रीन इंडिया मिशन के अन्तर्गत सन 2030 तक 2.5 से 3 अरब टन सीओ2 इक्विवेलेंट कार्बन सिंक क्षमता विकसित करने का लक्ष्य तय किया गया हैंे। अक्टूबर 2015 में इस संबंध में सभी राज्यों को निर्देश दिए गए। किन्तु मार्च 2025 दो राज्यों को छोड़कर ज्यादातर राज्यों ने इसका पालन ही नहीं किया। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ ने कार्बन सोखने की मात्रा मापने के लिए घाटपुर और सोनहट में 2 फ्लक्स टावर लगाए। इन दोनों पर करीब साढ़े तीन करोड़ रूपए खर्च भी किए गए। 2020 में शुरू की गई इस व्यवस्था में सेंसर और अन्य तकनीकी संसाधनों की कमी के कारण ये पूरा सिस्टम बेकार पड़ा है। कैग ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
कैग ने अपने आॅडिट के निष्कर्ष में यह भी बताया कि ग्रीन इंडिया मिशन में सभी राज्यों में हर स्तर पर निगरानी में काफी कमियाँ रही। यह भी पता नहीं चल सका कि जीआईएम ने जलवायु परिवर्तन से निमटने में अपना कितना योगदान दिया है।
कैग द्वारा मध्यप्रदेश में किए गए आॅडिट में यह भी पता चला कि 14 समितियों ने बिना कोई प्लान के ही काम कर दिया। प्रदेश के 8 संभागों में 70.67 करोड़ रूपये का भुगतान भी विभागीय स्तर पर कर दिया गया है। कैग की रिपोर्ट में यह भी बात सामने आई थी 145 समितियों में से मात्र 5 समितियों ने ही सीए से आॅडिट कराया। बाकी समितियों ने आॅडिट कराने का कष्ट ही नहीं उठाया। कैग ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया कि मध्यप्रदेश के बड़वानी जिले में 444 हेक्टेयर में काम शुरू होना बताया गया, लेकिन कैग द्वारा की गई जांच में आरएफ-269 सहित अन्य साईट पर कई जगह हरियाली नहीं मिली। यही नहीं 68 हेक्टेयर की एक साईट पर कोई काम ही नहीं मिला। कैग ने इस हालात पर भी चिंता व्यक्त की है।
      यहां यह उल्लेखनीय है कि पिछले दो दशक में मध्यप्रदेश सहित देश के सभी राज्यों में वन विभाग का अनाप-सनाप विस्तार किया गया। जिन जिलों में जिला अधिकारी के रूप में केवल एक वन मंडलाधिकारी और संभाग स्तर  पर वन संरक्षक पदस्थ रहते थे, वहीं संभाग स्तरीय पद को जिला स्तरीय बना दिया गया। अर्थात जिलों में वन मंडलाधिकारी की जगह वन संरक्षक पदस्थ किए गए। इसी प्रकार संभाग स्तर पर वन संरक्षक से उच्च पदों के अधिकारी पदस्थ किए गए। इसके साथ ही जिलों में और संभागों में अन्य अधिकारियों की भी पहले से अधिक तैनाती की जाने लगी। इसके बावजूद ग्रीन इंडिया मिशन के लक्ष्य और उपलब्धि आँखे खोलने वाली है। वन विभाग के अधिकारी अपने पदों के कर्तव्यों का पालन ही नहीं कर रहे हैं।
इस ग्रीन इंडिया मिशन की हालत बता रही है कि देश में सभी राज्य पौधारोपण के प्रति अत्यन्त लापरवाह हंै। देश के 16 राज्यों में की गई आॅडिट में से एक भी राज्य में ऐसी उपलब्धि नजर नहीं आई जो उल्लेखनीय हो। यह स्थिति अत्यन्त गंभीर और चिंताजनक है। केन्द्र सरकार को चाहिए कि जिन राज्यों में लक्ष्य की दयनीय उपलब्धि है, उन राज्यों के प्रदेश, संभाग व जिले स्तर के वन विभाग के अधिकारियों के विरूद्ध भी कार्रवाई करे, जो अपने कत्र्तव्य पालन में नाकाम रहे। इसके साथ ही राज्यांे से इस बारे में सवाल जवाब तलब किए जावें और इस मिशन के लक्ष्य 2030 तक गंभीरतापूर्वक कार्य कर उन्हें लक्ष्य की पूर्ति करने के सख्त निर्देश दिए जाएँ, ताकि जिस अच्छे उद्देश्य के तहत ग्रीन इंडिया मिशन शुरू किया गया था उसकी प्राप्ति की जा सकी।
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देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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