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गुरुजनों के पद प्रक्षालन और महाआरती के साथ 40 शिक्षकों का हुआ सम्मान


गुरुजनों के पद प्रक्षालन और महाआरती के साथ 40 शिक्षकों का हुआ सम्मान

विपिन जोशी स्मारक समिति का 42वां राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान समारोह संपन्न

कोलकाता के डॉ सुजय कुमार मंडल ‘सरस्वती पुत्र सम्मान’ से हुए सम्मानित

इटारसी। शिक्षक दिवस के अवसर पर पत्रकार एवं समाजसेवी प्रमोद पगारे द्वारा संस्थापित एवं प्रवर्तित विपिन जोशी स्मारक समिति का 42वां राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान समारोह शनिवार को द पार्क रिजॉर्ट इटारसी में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। समारोह में मध्यप्रदेश सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों से चयनित 40 श्रेष्ठ शिक्षकों एवं गुरुजनों का सम्मान किया गया।

कार्यक्रम आचार्य पंडित सोमेश परसाई के सानिध्य में आयोजित हुआ। समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. अजय गोयनका, चेयरमैन चिरायु हॉस्पिटल एंड मेडिकल कॉलेज, अति विशिष्ट अतिथि अजय गुप्ता, पूर्व एडिशनल एडवोकेट जनरल तथा विशेष अतिथि उषा खरे (केबीसी फेम) सहित अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

समारोह की शुरुआत गुरुजनों के पद प्रक्षालन एवं महाआरती के साथ हुई। विपिन जोशी स्मारक समिति के सदस्यों एवं अतिथियों ने सम्मानित शिक्षकों के चरण पखारकर उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। इसके बाद सभी चयनित शिक्षक-शिक्षिकाओं को ट्रॉफी, शॉल-श्रीफल, सम्मान पत्र एवं मेडल प्रदान कर सम्मानित किया गया। समिति की ओर से प्रदान की जाने वाली चलित ट्रॉफी भी प्रदान की गई।

सरस्वती पुत्र सम्मान

42वें राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान समारोह में इस वर्ष सर्वोच्च सरस्वती पुत्र सम्मान से  कोलकाता के डॉ. प्रो. सुजय कुमार मंडल को नवाजा गया है। उन्होंने 25 छात्रों का डॉक्टरेट और 15 का एम.फिल. के लिए मार्गदर्शन किया है। अभी 8 छात्र उनके मार्गदर्शन में पीएच.डी. कर रहे हैं। उन्होंने 5 पुस्तकों सहित लगभग 140 शोधपत्रों का प्रकाशन किया है। वे वेल्लूर रामकृष्ण मिशन, स्वामी विवेकानंद विश्वविद्यालय में भी सेवाएं दे चुके हैं। वर्तमान में वे कल्याणी विश्वविद्यालय के लोककथा, संस्कृत विभाग अध्यक्ष के रूप में पदस्थ हैं।

ज्ञान गंगा सम्मान

इस वर्ष का ज्ञान गंगा सम्मान मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान भोपाल के डॉ. गौरव द्विवेदी को दिया गया है। उन्होंने ऊर्जा एवं नवीनीकरण ऊर्जा के क्षेत्र में शिक्षण एवं शोध के साथ विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की उपलब्धियां प्राप्त की हैं।
इनमें ऊर्जा के क्षेत्र में काम करने वाले प्रमुख वैज्ञानिकों में शीर्ष 2 प्रतिशत में स्थान, यंग साइंटिस्ट अवार्ड, भारतीय पेटेंट प्रकाशित, 120+ शोधपत्र प्रकाशित तथा विभिन्न पुस्तकें प्रकाशित करना आदि उपलब्धियां शामिल हैं।

इस अवसर पर सम्मानित सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं का स्वस्ति वाचन के साथ अभिनंदन किया गया। पंडित सरवन नगाइच के सानिध्य में स्वस्ति वाचन संपन्न हुआ।

शिक्षकों के प्रति कृतज्ञता है सम्मान

मुख्य अतिथि डॉ. अजय गोयनका ने कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान प्रदान नहीं करते, बल्कि विद्यार्थियों के जीवन की दिशा निर्धारित करते हैं। समाज में गुरु के योगदान का सम्मान वास्तव में आने वाली पीढ़ियों के निर्माण के प्रति सम्मान है।

अति विशिष्ट अतिथि अजय गुप्ता ने शिक्षक और विद्यार्थी के संबंध तथा जीवन निर्माण में गुरु की भूमिका पर विचार व्यक्त किए। विशेष अतिथि श्रीमती उषा खरे ने भी शिक्षकों के योगदान को नमन करते हुए अपने विचार रखे।

आचार्य पंडित सोमेश परसाई ने गुरु परंपरा की महत्ता बताते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सदैव सर्वोच्च रहा है। उन्होंने कहा कि गुरुजनों का सम्मान भारतीय संस्कार और परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

ऐसा सम्मान कहीं नहीं

समिति के संस्थापक एवं संरक्षक प्रमोद पगारे ने कहा कि शिक्षक सम्मान के कार्यक्रम अनेक स्थानों पर होते हैं, लेकिन शिक्षकों के पद प्रक्षालन और महाआरती के माध्यम से उनका अभिनंदन करने की परंपरा विपिन जोशी स्मारक समिति के आयोजन की विशिष्ट पहचान है।

समिति अध्यक्ष अधिवक्ता रमेश के. साहू ने कहा कि संस्था लगातार 42 वर्षों से राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान समारोह के माध्यम से शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को सम्मानित कर रही है। देश, प्रदेश एवं जिले के विशेष योग्यता और प्रतिभा रखने वाले शिक्षकों का चयन कर उन्हें सम्मानित किया जाता है। समिति सचिव विनीत चौकसे ने आयोजन की जानकारी देते हुए कहा कि गुरुजनों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता की यह परंपरा निरंतर आगे बढ़ती रहेगी।

कार्यक्रम में अतिथियों के साथ समिति के संस्थापक संरक्षक प्रमोद पगारे, अध्यक्ष रमेश के. साहू एडवोकेट, सचिव विनीत चौकसे, कोषाध्यक्ष नीलेश जैन, स्थायी संचालक अनिल झा सहित समिति के पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन लायंस क्लब के पूर्व गवर्नर अनिल झा ने किया। समारोह के प्रारंभ में स्वर मालिका म्यूजिक क्लास, इटारसी के शिष्यों द्वारा सरस्वती वंदना की प्रस्तुति दी गई। आयोजन को सफल बनाने में समिति के सदस्यों एवं सहयोगियों का विशेष योगदान रहा।

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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