ad

काव्य : गणेशोत्सव - कृष्ण कुमार गुप्ता, पुणे,


काव्य : 

गणेशोत्सव 

विघ्न विनाशक मंगलकारी का हो गया आगमन 
ज्ञान बुद्धि के दाता समृद्धि का वरदान दिलायें ।
दूर करते संकट सारे चमकाते किस्मत का तारा
प्रथम पूज्य प्रभु गणनायक बिगड़े काम बनायें ।।

मूषक की सवारी सोहे  मोदक का भोग सुहाता 
लम्बोदर का रूप निराला कान बड़े सुखदाई हैं ।
चार भुजा में अस्त्र शस्त्र माथे सिंदूर दमकता 
सुनकर सभी की मूक पुकारें करुणा बरसाई है।।

प्रथम पूज्य यह देव गजानन हम सबके प्यारे 
माँ पार्वती के लाडले प्यारे  शिव के राजदुलारे ।
वेद पुराण गाते हैं कथा चरणों में सर झुकायें 
रिद्धि सिद्धि के स्वामी भक्तों के हैं रखवाले ।।

जात-पांत का भेद मिटाके एकता सूत्र में पिरोते
भक्ति-भाव से झूमते सब गूँजता जयकारा भारी ।
महामना तिलक की सामाजिक समरसता जगाते
गणपति की महिमा इस दुनिया में सबसे न्यारी ।।

श्रद्धा विश्वास जगाती बप्पा की यह पावन सूरत 
दास दिनों तक बप्पा करते हैं खुशियों की बौछार ।
जीवन की हर राह पर सजती इनकी प्यारी मूरत
मोदक का भोग सजे और गूँजता है जय-जयकार।।

1893 की पावन और ऐतिहासिक बेला याद आये  
पेशवाई संस्कृति का वैभव महलों तक सिमट गया ।
परतंत्र भारत की धरती पर एक नवीन चेतना छाई
तिलक के प्रयास से जन जन का उत्सव बन गया।।
 
अंग्रेजों ने लगा दी पाबंदी  लोग कहीं मिल न पायें 
तब लोकमान्य तिलक को गणेशोत्सव उपाय बूझा ।
क्रांति की सुलगती चिंगारी को मिल हवा देने लगे  
गणेश उत्सव के बहाने ही स्वतंत्रता का मार्ग सूझा ।।

केसरी अखबार की हुंकार और पुणे का केसरी वाड़ा
जातपात के भेद मिटाकर एक पंडाल में आने लगे।
गूंजा "गणपति बाप्पा मोरया" टूटा बंदिशों का घेरा
आरती की आड़ में स्वतंत्रता गीत थे गाये जाने लगे।।

भाऊ रंगारी और तिलक की जोड़ी ने इतिहास रचाया
गणेश उत्सव उस समय आज़ादी का सूत्रधार था बना  ।
धार्मिक अनुष्ठान एक महा हथियार बना लिया गया 
तोड़ीं जिसने गुलामी की बेड़ियाँ ये उत्सव महान बना।।
 
जात-पांत का भेद मिटा सबको साथ में लाते बप्पा
एक पंडाल में जुड़ती दुनिया कोई न पराया होता है।
ऊंच नीच की तोड़ दीवारें हर दिल को हर्षाते गणेश 
भेदभाव को भूल यहाँ हर मानव बस मानव होता है ।।
 
दस दिन पड़ोसी मिल बैठते मिट जाती है कड़वाहट
बाँटके मोदक प्रसाद खा  प्रेम का पाठ सीख जाते हैं  ।
गणराया के आने से आती है  रिश्तों में मीठी आहट
ये उत्सव हर सूने आँगन को  खुशियों से महकाते हैं ।।

ॐ गं गणपतये नमः का  गूँज रहा पावन जय कारा 
बुद्धि ज्ञान और विद्या दाता मन का तिमिर मिटाते ।
काट रहे भव बंधन बप्पा  कर देते संकटों से उद्धार
दस दिनों की भक्ति से घट घट में हैं प्रभु बस जाते।।

- कृष्ण कुमार गुप्ता, पुणे, महाराष्ट्र 
8080781726
देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

Post a Comment

Previous Post Next Post