काव्य :
जन्मोत्सव
अंगना में आई
बहार
बाँके बिहारी बन
बचवा आए अंगना हमार
सब सखियन मिल
सोहर गाए
ममता का उमड़
रहा सीने में
ज्वार ।
बंदनवार सजे हैं
द्वार
सुहागनें मिल गाएं
मंगलगान
द्वाराचार पूज रंगोली
सजे हर द्वार
घर-घर धूम मची
नाचे ग्वाल-गोपाल।
देने बधाइयाँ तांता लगा देवताओं का हमरे द्वार
तीनों लोकों में मची
धूम
धरा पर क्रीड़ा करने
आए विष्णु ले
अवतार
धर फकीरी वेश
देवों के देव महादेव भी
आए द्वार।
*नंद के आनंद भयो*
*जय कन्हैयालाल की*
गली-गली के हर छोर
से आ रही आवाज
इसी सुरीले गान की
हर घर सजधज नंद
-घर चला
महक रहा गोकुल
सगरा पकवान की
खुश्बूओं से ।
- डा.नीलम , अजमेर
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