माह सितंबर और हिंदी
लो सितंबर का महीना भी आ गया। सितंबर का महीना मतलब हिंदी का महीना। आम जनता पर तो कोई अंतर नहीं पड़ता परंतु केंद्रीय सरकारी कार्यालयों, राष्ट्रीयकृत बैंकों, उपक्रमों पर पड़ता है और वे हिंदी मय हो जाते हैं। विश्वविद्यालय, महाविद्यालय और हिंदी के प्रचार प्रसार में लगीं संस्थाओं में हिंदी के प्रति एक जागृति की भावना पैदा हो जाती है जो साल भर तक उन्हें अनुप्राणित करती रहती है। हिंदी के सुनामधन्य लेखक व कवि प्रतिस्फूर्त हो जाते हैं और स्वर्गीय लेखक कवि भी जीवन पा जाते हैं। क्या हिंदी और क्या हिंदीतर राज्य व क्षेत्र सभी हिंदीमय हो जाते हैं। किसी समारोह या कार्यक्रम में जिन्हें कोई स्थान नहीं मिल पाता वे हिंदी के साथ हो रहे छल के हिमायती बन जाते हैं। पर सितंबर माह हिंदी का माह तो होता ही है।
जहाँ जहाँ हिंदी विभाग हैं उनसे जुड़े अधिकारी, कर्मचारी, प्राध्यापक व अध्यापक स्फूर्ति से भर उठते हैं। सभी किसी न किसी हिंदी के विद्वान को बुला कर अपने संस्थान के अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों में हिंदी के प्रति एक नया जोश भर देना चाहते हैं। कोई अपने संस्मरण सुनाते हैं हिंदी की गौरव गाथा व अधोमुखी गाथा के। वे अपने सामने उपस्थित वृंद को मोहित कर देना चाहते हैं। ऐसा ही एक उदाहरण याद आता है। बात पुरानी है। हिंदीतर क्षेत्र में एक विश्वविद्यालय में हिंदी की एम.फिल के विद्यार्थियों को प्रोफेसर साहब पढा रहे थे कि हम हिंदी दिवस इसलिए मनाते हैं कि 1936 में कांग्रेस ने हिंदी को अपने एक अधिवेशन में राजभाषा के रूप में मान्यता प्रदान की थी। जब उनसे पूछा गया कि संविधान में हिंदी को भारत संघ की राजभाषा बनाया गया था लेकिन आप यह क्या बता रहे हैं तो वे प्रोफेसर साहब मायूस होकर बोले कि विभाग बना दिया, प्रयोजन मूलक हिंदी की उच्च शिक्षा भी प्रारंभ कर दी लेकिन उसका न तो कोई पाठ्यक्रम है और न ही पुस्तकें। हम जहाँ तहाँ से नोट्स बनाकर पढ़ाते हैं। संस्थान जो केवल सितंबर में हिंदी संबंधी कार्यक्रम करते हैं वे वक्ताओं से उच्च स्तर की नई बात जानना चाहते हैं।
वाक्पटु वक्ता वाह-वाही पाकर अपनी पीठ थपथपा लेते हैं और जो श्रोताओं को प्रभावित नहीं कर पाते वे ऐसे आमंत्रण से वंचित हो जाते हैं। ऐसा लगता है कि न वक्ता अपनी जिम्मेदारी समझते हैं और न ही श्रोता। हिंदी को मान्यता न देने के इच्छुक तो संविधान की ही आलोचना करते हैं कि संविधान में 15 वर्ष तक हिंदी को राजभाषा बनाया गया परंतु अंग्रेजी में काम करते रहने की छूट को अनिश्चितकालीन छूट दे दी तो हिंदी का राजभाषा पद अपने आप ही लुप्त हो गया। तमाम तर्क वितर्क प्रस्तुत होते हैं परंतु हिंदी को भारत संघ की राजभाषा के रुप में सम्मान नहीं देना चाहते। भारत संघ कोई स्थान या क्षेत्र विशेष नहीं है, संपूर्ण भारत है जिसमें सभी प्रदेश व क्षेत्र शामिल हैं और भारत का अस्तित्व उसके सभी मंत्रासय और उनसे संबद्ध अधीनस्थ कार्यालय, विभाग व उपक्रम आदि हैं चाहे वे कहीं भी स्थित हों। हिंदीतर प्रदेशों में हिंदी को केंद्र सरकार की राजभाषा के रूप में सम्मान दिया जाएगा तो वहाँ की क्षेत्रीय भाषाओं का सम्मान कम नहीं होता।
विश्व के सभी देशों में हिंदी बोली समझी जाती है और वह विश्व में दूसरे स्थान पर है लेकिन भारत में हिंदीतर क्षेत्रों में हिंदी बोलना तक अपराध जैसा माना जाता है, ऐसा महसूस होता है। विश्व में अनेक देश ऐसे हैं जहाँ राष्ट्रभाषा नहीं है और अनेक राजभाषाएं भी हैं, परंतु नफ़रत की भावना होने का कोई समाचार नहीं मिलता। भारत में यही अफ्सोस जताया जाता है कि भारत की कोई राष्ट्रभाषा नहीं है। राजभाषा हिंदी को राष्ट्रभाषा बनने नहीं दिया जाता और राष्ट्रभाषा चाहते भी हैं।
प्रौद्योगिकी , कंप्यूटरीकरण और ए.आई. ने विश्व में भाषायी अंतर बहुत कम कर दिया है और एक भाषा न जानने वाला भी उस भाषा में काम कर सकता है। अब जरूरत है हर भाषा के प्रति प्रेम की। फिर भी जिस तरह विश्व के सभी देशों में भारत की भाषा हिंदी मानी जाती है वैसे ही भारत में भारत संघ की राजभाषा को हर नागरिक द्वारा माना जाए और उसे केंद्र सरकार की राजभाषा के रूप में सम्मान दिया जाए तो हिंदी को संविधान सम्मत स्थान व सम्मान अवश्य प्राप्त होगा। हिंदी का उत्थान चाहने वाले विद्वानों व संस्थाओं के प्रयासों को सम्मान दिया जाए। विश्व के हर देश में हिंदी का प्रचार प्रसार व उसका उत्थान करने वाली संस्थाओं व उनसे जुड़े विद्वानों को हृदय से सम्मान दिया जाए। फिर केवल सितंबर माह ही हिंदी मय नहीं होगा, पूरा वर्ष हिंदी मय होगा।
- डॉ. सत्येंद्र सिंह
पुणे, महाराष्ट्र
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सत्येंद्र सिंह जी,
ReplyDeleteहिंदी भाषा और सितम्बर का महिना। रोचक तथ्यों को लेकर उचित मार्गदर्शन किया गया है।
भारतवर्ष की सभी भाषाओं को सम्मान देना चाहिए। हिंदी विश्व में भारत की पहचान है।
इसलिए नागरी लिपि को लेकर विनोबा भावे जी आग्रही थे।
धन्यवाद सहित हिंदी दिवस की अग्रिम शुभकामनाएं!
लतिका
सितम्बर महिना 👌 बहोत बढीया ! शुभकामनाए 🌹🌹🌹🌹
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