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राम केवल मूर्ति है या आदर्श..... ! -त्रिलोक गिरी गोस्वामी बावा घठोली, बेमेतरा


विचारणीय :

राम केवल मूर्ति है या आदर्श..... !     

    वेदान्त का मूल आग्रह बाहरी आडम्बर से अधिक आत्मशुद्धि, आत्मबोध और मानवता पर है। खान-पान, पहनावा और कर्मकांड व्यक्ति की व्यक्तिगत आस्था और साधना के विषय हो सकते हैं। किन्तु उनका वास्तविक मूल्य तभी है जब वे मनुष्य के आचरण में करुणा, सत्य और सद्भाव को जन्म दें।
                        आज राम केवल मंदिरों में विराजमान मूर्तियों तक सीमित हो गये है। विडंबना देखिए कि जो राम पूरे ब्रह्मांड के रक्षक हैं, उनके ही धाम में इंसानी लालच और चोरी जैसी घटनाएं हो रही हैं, क्योंकि हमने उनके आदर्शों को भुला दिया है।" शायद राम की मूर्ति से ज्यादा राम के आदर्शों को महत्व दिया जाता तो ऐसी घटना कभी नहीं होती।
समाज में राम की मूर्ति आराधना का विषय है न कि उनके विचार, आदर्श, और यही सबसे बड़ी विडम्बना है। जब तक राम के आदर्श जिन्दा थे तब तक ये माना जाता था कि एक ही घाट में शेर और बकरी पानी पीते थे परन्तु जब राम केवल मूर्तियों में रह गये तो देश में सामाजिक तनाव की स्थिति निर्मित हो गयी। इंसान इंसान के बीच नफरत की दीवार खड़ी हो गयी।
इतिहास गवाह है कि 14 शताब्दी के उत्तरार्द्ध में  भक्तिकाल के  दौरान   आक्रांताओं ने  मंदिरों व मूर्तियों को नष्ट करने का प्रयास किया,परन्तु वे सनातन संस्कृति को नहीं मिटा सके। इसका कारण  था कि मूर्तियों का भंजन तो किया जा  सकता हैं, लेकिन जो राम, शिव, महावीर या बुद्ध हमारे भीतर आदर्श और विचार के रूप में जीवित हैं, उन्हें कोई आक्रांता नष्ट नहीं कर सकता। यदि राम, का अस्तित्व अपने प्रतीक मे‌ निहित होता तो शायद मूर्तियों के नष्ट होने के साथ हम उन्हें भी भूल जाते, परन्तु राम हमारे हृदय में आदर्श, विचार के रूप में विद्यमान थे इसलिए वे आज भी जिन्दा हैं, और हमारे लिये पूजनीय हैं।
अंततः मैं यही कहना चाहूंगा कि राम केवल पूजे जाने वाले देव नहीं बल्कि जिये जाने वाले आदर्श  हैं, यही राम की वास्तविक प्रासंगिकता है और यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धा है।

 - त्रिलोक गिरी गोस्वामी 
बावा घठोली, बेमेतरा, छत्तीसगढ़
देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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