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काव्य : नारी में बसते माँ दुर्गा के नौ रूप - सुन्दर लाल डडसेना "मधुर" ग्राम-बाराडोली



काव्य : 

नारी में बसते माँ दुर्गा के नौ रूप

नारी के हर रूप में, माँ दुर्गा का वास है।
उसके ही आँचल तले, जीवन का प्रकाश है।
नौ रूपों में पूजते, जिस जगदम्बा को हम।
नारी का सम्मान ही, शक्ति का सम्मान है।।

*माँ शैलपुत्री*
पर्वत-सी दृढ़ता लिए, जो संकट से टकराती है।
टूनटे हुए विश्वास में, फिर से आस जगाती है।
जब बेटी बनकर घर में, खुशियों के दीप जलाती है।
शैलपुत्री की शक्ति तब, धरती पर उतर आती है।।
नारी के हर रूप में, माँ दुर्गा का वास है....1

*माँ ब्रह्मचारिणी*
तपकर अपने ध्येय में, जो कर्तव्य निभाती है।
कठिन डगर पर भी कभी, धीरज नहीं गँवाती है।
शिक्षा, सेवा, साधना से, जग में अलख जगाती है।
ब्रह्मचारिणी रूप में, नव इतिहास बनाती है।।
नारी के हर रूप में, माँ दुर्गा का वास है....2

*माँ चंद्रघंटा*
अन्यायों की आहट पाकर, रणचंडी बन जाती है।
निर्बल के अधिकारों खातिर, बाधाओं से टकराती है।
साहस की हुँकार से, भय के दुर्ग गिराती है।
चंद्रघंटा के तेज से, नारी शक्ति दिखाती है।।
नारी के हर रूप में, माँ दुर्गा का वास है....3

*माँ कूष्माण्डा*
अपनी मीठी मुस्कान से, घर-आँगन महकाती है।
सूने मन के कोने में, आशा के पुष्प खिलाती है।
श्रम-साधना से अपनी, जग-सृष्टि को सजाती है।
कूष्माण्डा बनकर सदा, जीवन में उजियारा लाती है।।
नारी के हर रूप में, माँ दुर्गा का वास है....4

*माँ स्कंदमाता*
गोदी में संतान लिए, ममता की गंगा बहती है।
बच्चों के हर सुख-दुख में, जो ढाल बनके रहती है।
भूखी रहकर भी जो अपने, बच्चों का पेट भरती है।
स्कंदमाता बनकर नारी, वात्सल्य सुधा बरसाती है।।
नारी के हर रूप में, माँ दुर्गा का वास है....5

*माँ कात्यायनी*
दुष्टों के दर्प मिटाने को, जब नारी शस्त्र उठाती है।
स्वाभिमान की रक्षा में, दुर्गा-सी बन जाती है।
अन्यायों के महिषासुर को, निर्भय हो ललकारती है।
कात्यायनी का रूप धरे, वह विजयश्री पा जाती है।।
नारी के हर रूप में, माँ दुर्गा का वास है....6

*माँ कालरात्रि*
घोर अँधेरों में भी जो, आशा की दीप जलाती है।
काल बने संकट के आगे, चट्टान बन जाती है।
दुख, संताप और विपदा से, लड़कर राह बनाती है।
कालरात्रि का तेज लिए, नारी अंधियारा मिटाती है।।
नारी के हर रूप में, माँ दुर्गा का वास है....7

*माँ महागौरी*
निर्मल मन, पावन भावों से, जो जग को महकाती है।
सेवा, करुणा, प्रेम-सुधा से, रूठे मन को मनाती है।
क्षमा, दया और शांति का, जब संदेश सुनाती है।
महागौरी बनकर नारी, मानवता सिखलाती है।।
नारी के हर रूप में, माँ दुर्गा का वास है....8

*माँ सिद्धिदात्री*
ज्ञान, कला और कौशल से, जो जीवन सफल बनाती है।
अपने पुरुषार्थ के बल पर, नई मंजिलें सजाती है।
घर के आँगन से नभ तक, अपनी ध्वजा फहराती है।
माँ सिद्धिदात्री बन नारी, सिद्धि-सफलता पाती है।।
नारी के हर रूप में, माँ दुर्गा का वास है....9

*नारी वंदन*
माँ भी वही, बहन भी वही, बेटी और सहचारिका है।
कर्मभूमि की शक्ति वही, जीवन की संचालिका है।
नौ दुर्गाओं का तेज लिए, नारी सृष्टि सँवारती।
जिस घर इसका मान हो, खुशियाँ वहीं निखारती।।

नारी के हर रूप में, माँ दुर्गा का वास है।
उसके ही आँचल तले, जीवन का प्रकाश है।
नौ दिन पूजें मातृशक्ति, नौ रूपों का गान करें।
नारी का सम्मान करें, भारत का उत्थान करें।

- सुन्दर लाल डडसेना "मधुर"
ग्राम-बाराडोली (बालसमुंद), पो.-पाटसेन्द्री
तह.-सरायपाली, जिला-महासमुंद (छ. ग.) पिन- 493558
मोब.- 8103535652
देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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