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काव्य : विजयादशमी - छगनलाल मुथा-सान्डेराव ,मुम्बई


काव्य : 

विजयादशमी

अश्र्विन मास का शुक्ल पक्ष, नौ दिनों की नवरात्रि करते,
दसवें दिन दशहरा मनाया जाता है।
देवी दूर्गा के नौ रूपों की,भक्ति आराधना गरबा करते,
दसवें दिन रावण को जलाया जाता है।

रावण का चेहरा एक ही था,पर सिर अलग-अलग ही थे।
आज के रावण का सिर एक,पर दस तरह के मैले चेहरे हैं।
रावण को तो मारा राम ने, इस रावण को कौन मारेगा।
अपने अंदर छिपे अवगुणों से,कौन पहचान करायेगा।

अंधकार  मिटाकर उजाला करने,एक दीपक ही काफी है।
अपने मन के अवगुणों को मिटाने,एक सोच ही काफी है।
रावण को तो हम साल में,सिर्फ एक दिन ही जलाते है।
बुराई पर अच्छाई की जीत का,त्योहार दशहरा मनाते है।

आजकल कई तरह के रावण हैं,रोज जलाना चाहिए।
राम के आदर्श संस्कारों से  हमें ज्ञान देना लेना चाहिए।
दस तरह के पाप जीवन में,काम,क्रोध,लोभ,मोह,मद,मत्सर,
अहंकार, आलस्य, हिंसा चोरी का त्याग होना चाहिए।

दशहरे के दिन दिये जलाकर, संकल्प हमे ये करना हैं।
मन में छिपे बुराइयों का,हमे दहन मुथा अब करना हैं।

- कवि छगनलाल मुथा-सान्डेराव ,
मुम्बई

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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