ad

कर्म से तपोवन तक' परिचर्चा ने गर्मी को पछाड़ा


 

कर्म से तपोवन तक' परिचर्चा ने गर्मी को पछाड़ा

दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच दिल्ली इकाई के द्वारा दिनाँक 2 जून 2024 की संध्या 4 बजे  अंतरराष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच की संस्थापिका, अध्यक्ष और वरिष्ठ साहित्यकार संतोष श्रीवास्तव  की पुस्तक  'कर्म से तपोवन तक' पर परिचर्चा का आयोजन किया गया।  कार्यक्रम की अध्यक्षता हिंदी अकादमी, दिल्ली के उप सचिव श्री ऋषि कुमार शर्मा  ने की।  सुरुचि साहित्य कला परिवार के संस्थापक महासचिव, वरिष्ठ साहित्यकार मदन साहनी  मुख्य अतिथि की भूमिका में थे और वरिष्ठ साहित्यकार, पत्रकार और प्रकाशक देवेन्द्र बहल एवं डॉ. वन्दना शर्मा  विशिष्ट अतिथि के रूप में मंचासीन थे।  अतिथि वृन्द द्वारा माँ शारदे के समक्ष दीपदान से कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। 

नीलम दुग्गल 'नरगिस'   ने सुमधुर गायन से सरस्वती वन्दना प्रस्तुत की।मंचासीन अतिथियों का स्वागत  सभी को  श्रीफल और पुस्तक से किया गया।

कार्यक्रम के प्रारम्भ में दिल्ली इकाई की निदेशक डॉ. दुर्गा सिन्हा  ने संस्था का परिचय दिया। तत्पश्चात  एकता अमित व्यास  की पुस्तक अमीरन का विमोचन हुआ। 

सर्वप्रथम संतोष श्रीवास्तव  ने अपनी पुस्तक 'कर्म से तपोवन तक'का परिचय देते हुए कहा कि महाभारत के उद्योग पर्व की एक संक्षिप्त पंक्ति को आधार बनाकर उन्होंने यह उपन्यास लिखा। 

कर्म से  तपोवन तक' 'पुस्तक की समीक्षा डॉ. प्रमिला वर्मा  एवं एकता अमित व्यास  ने प्रस्तुत की।

पुस्तक की समीक्षा प्रस्तुत करते हुए एकता अमित व्यास  ने लेखिका से कुछ अनुत्तरित प्रश्नों का जवाब माँगा और एक जिज्ञासु पाठक एवं प्रखर आलोचक की भूमिका का बख़ूबी निर्वहन किया।डॉ. प्रमिला वर्मा  ने पुस्तक की विस्तृत समीक्षा प्रस्तुत की , जिसने उपस्थित सुधि साहित्यकारों को पुस्तक पढ़ने की लालसा से भर दिया। 

एकता अमित व्यास  ने अपनी पुस्तक की भूमिका और उसके प्रकाशन से सम्बंधित जानकारी बहुत ही रोचक अंदाज में साझा की। उनकी पुस्तक ' अमीरन ' पर डॉ. रेणु ने अपनी बात कही। 

मुख्य अतिथि  मदन साहनी ने अपने वक्तव्य में  प्रेम का विशद स्वरूप बताते हुए उसे दैहिक आकर्षण से भिन्न बताया और कर्म से तपोवन के विषय में अपने विचार रख सभी श्रोताओं को मंत्र-मुग्ध कर लिया।

 वरिष्ठ अतिथि देवेन्द्र बहल और डॉ वंदना ने भी पुस्तक पर अपने विचार साझा किए।अध्यक्ष ऋषि कुमार शर्मा  का अध्यक्षीय भाषण बहुत ही प्रेरक था,जिसमें उन्होंने नयी पीढ़ी को हिन्दी एवं हिन्दी साहित्य से जुड़ने का परामर्श भी दिया और बताया कि कर्म से तपोवन पढ़ने पर आप पाएंगे कि सूत्र वाक्य में प्रश्न करते हुए संतोष जी ने बहुत कुशलता से समाधान भी प्रस्तुत किया है।अतएव यह पुस्तक आज के परिप्रेक्ष्य में पढ़ी भी जाएगी और अपना स्थान भी बनाएगी।

     अंतरराष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच दिल्ली इकाई की अध्यक्ष शकुंतला मित्तल के कुशल निर्देशन एवं सधे हुए संचालन ने कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिए। कार्यक्रम के अंत में  वरिष्ठ कवयित्री वीणाअग्रवाल  ने सभी का आभार प्रकट किया।कार्यक्रम के बाद संतोष श्रीवास्तव ने युवा कवि हेमन्त की स्मृति में केक काट कर सभी को भाव-विभोर कर दिया। वन्दना रानी दयाल  ने हेमन्त की कविता का गायन कर  माहौल को भावपूर्ण बना दिया। 

इस कार्यक्रम की सफलता में दिल्ली इकाई की महासचिव अर्चना पांडेय और संरक्षक वरिष्ठ साहित्यकार डॉ शुभ्रा,  कार्नेलिया कौटिल्या एवं एकता अमित व्यास  की पुत्री  का विशेष योगदान रहा।  अंतर्राष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच, दिल्ली   इकाई की सक्रियता, कार्यशैली और आयोजन की संतोष श्रीवास्तव ने  प्रशंसा और सराहना की।

इस अवसर पर डॉ सविता चड्डा, डॉ कल्पना पांडेय, शारदा मित्तल, वीणा अग्रवाल, रेणु मिश्रा, सविता स्याल, रानी श्रीवास्तव, संतोष संप्रीति, लता ठाकुर, अंजू दुआ जैमिनी,नीलम दुग्गल नरगिस, डॉ वनिता शर्मा, डॉ अंजना, अर्चना उपाध्याय, डॉ जेनी शबनम,अमित व्यास सहित अनेक प्रतिष्ठित वरिष्ठ साहित्यकारों ने दिल्ली , गाजियाबाद, मुरादाबाद नौएडा, गुरुग्राम, फरीदाबाद और पालम, भोपाल ,कच्छ से उपस्थिति दर्ज कराई।

 

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

Post a Comment

Previous Post Next Post