विविध : नीलकंठ धाम (पोइचा)
जिला नर्मदा के वड़ोदरा से 65•7कि.मी. दूर ग्राम पोइचा में नर्मदा नदी के तट पर 105 एकड़ में विस्तार से फैला यह मंदिर दोभागों में बंटा है । एक ओर सहजानंद ग्लोबल यूनिवर्स है तो दूसरी ओर नीलकंठ धाम भगवान स्वामी नारायण का भव्य आलीशान महल नुमा मंदिर ।
मंदिर के प्रवेशद्वार पर ही नटराज शिव की विशाल मूर्ति मंदिर के अंदर भव्य सरोवर जिसके बीचोंबीच शिवलिंग गणेश जी और हनुमान जी की मूर्ति।मंदिर के चारों ओर छोटे -छोटे मंदिर जिनमें भगवान विष्णु के सभी अवतारों की मूर्तियां और उनका चरण प्रक्षालन करते हुये ऋषि मुनि । मुख्य मंदिर भगवान शेषशायी विष्णु और लक्ष्मी जी की विशाल मूर्ति उनके पास स्वामी नारायण की मूर्ति जिसका जल से भक्त गण जलाभिषेक करते हुये पूजा आरती करते । मंदिर मे सुबह 5बजे से 6बजे आरती का समय और शाम को 6बजे से 7बजे तक । मंदिर से नीचे की ओर 108 गौमुखी गंगा से बहती नर्मदा मैया की जल धारा और देवी नर्मदा की मूर्ति शिव जी के मंदिर के चारों नर्मदा मैया के जल कु बहती स्वच्छ निर्मल जलधारा जिसमें शाम को चार बजे नौका विहार करते चारों ओर सभी मंदिरों की आरती का प्रावधान जो विशेष रूप से दर्शनीय है । रात को रंग बिरंगी रोशनियों में जगमगाता मंदिर । मंदिर और सरोवर के पर पर कोटे पर स्थापित सभी देवी देवताओं की भव्य सुंदर मूर्तियां अपने आप में अलौकिक अनुभूति का अहसास कराता नीलकंठ धाम ।
नीलकंठवर्णी स्वामी नारायण का मंदिर अपने वास्तु कला का बेजोड़ नमूना विश्व प्रसिद्ध अपने आप में अद्भुत है । सनातन धर्म के पौराणिक आख्यान बड़े ही सुन्दर ढंग से मूर्तियों के माध्यम से अपनी कथा कहते । मंदिर परिसर में भक्त गण और यात्रियों के ठहरने की सुंदर व्यवस्था है।इस मंदिर को देख कर कहीं से भी यह अहसास नहीं होता कि हम किसी मंदिर में है बल्कि किसी आलीशान भव्य महल में घूमने का अहसास होता है ।शायद इसीलिए इसको हवेली या महल की संज्ञा प्राप्त है ।
स्वामी नारायण का ही दूसरा नाम नीलकंठ वर्णी है इसलिए इसे नीलकंठ धाम कहते हैं ।इस मंदिर का निर्माण स्वामी नारायण गुरुकुल राजकोट द्वारा उनकी स्मृति में करवाया गया ।
- उषासक्सेना,भोपाल
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