काव्य :
आश्रय
आ जाओ ऐ नन्ही चिरैया
नेह प्रीत की बगिया में।
विकट धूप में यूं न भटको
छाँव नहीं मिल पायेगी ।
ममता करुणा की प्यार भरी
इस छैयां में, कुछ पल चैन के
जी लो न।
बिन हरियाली सूनी पड़ी है,
धरती मैया की ये बगिया।
नदिया झरना विष से भरे हैं।
करवे का जल पी लो न।
छोटा सा ये नीम पेड़ है, इस
पर नीड़ बना लो न।
दाना पानी चुग्गा संग सभी मिल
जायेगें।
छोटे से इस नीम पेड़ पर, दिन
अच्छे कट जाएंगे।
हँसते गाते, पवन सलोनी खूब
तुम्हें दुलरायेगी।
भूल जाओगी ग्रीष्म की पीड़ा,
नव पल्लव की छाया में।
आ जाएंगे संगी साथी, संग
तुम्हारे चहकेगें, हरी भरी इस
छैयां में दिन खुशी के बीतेंगे।
आ जाओ ऐ नन्ही चिरैया,
नेह प्रीत की बगिया में।
- उषा सोनी,भोपाल
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