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काव्य : जो राम तुम्हारे भीतर बैठा ,पहले उसको तो पहचानो -मनोज कान्हे 'शिवांश' ,इंदौर


 काव्य : 

जो राम तुम्हारे भीतर बैठा ,पहले उसको तो पहचानो


राम तुम्हें यदि पाना हो तो,

शबरी के दर जाना होगा।

राम मिलेंगे निश्चित तुमको, 

मन का भेद मिटाना  होगा। 

राम मिलेंगे,किन्तु तुमको, 

पहले संयम मे रहना होगा। 

जीवन के हर कांटे को, 

हँसते हँसते सहना होगा। 

मात-पिता के मन को,

जब तुम सुख पंहुचाओगे।

सच कहूँ तभी राम को,

अपने आँगन मे पाओगे। 

भाई से भाई का रिश्ता, 

निस्वार्थ यदि निभाओगे।

तब तुम श्री राम को, 

सन्मुख अपने ही पाओगे।

राम तुम्हें मिल जायेंगे, 

जीवन की कठिन कसौटी मे। 

राम मिलेंगे तुमको केवल, 

निर्धन की सुखी रोटी मे ।

राम तुम्हें नहीं मिलने वाला ,

अहंकार की लंका मे। 

राम नहीं मिलने वाला, 

निर्बल मन की शंका मे ।

हाँ,,,राम तुम्हें मिल जाएंगे,,,,

किन्तु ,तुम इतना जानो।

जो राम तुम्हारे भीतर बैठा ,

पहले उसको तो पहचानो,,,!!


- मनोज कान्हे 'शिवांश' ,इंदौर

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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