गोष्ठियां अदब की पाठशाला होती हैं। यहां नए रचनाकार अपनी रचनाएं मांझते हैं - गोकुल सोनी
वरिष्ठ नागरिक काव्य मंच की मासिक गोष्ठी संपन्न
भोपाल। दिनांक 17/7/2024 बुधवार को वरिष्ठ नागरिक काव्य मंच की माह जुलाई की गोष्ठी, श्रीमती विद्या श्रीवास्तव के निवास पर आयोजित की गई। जिसमें मुख्य अतिथि आदरणीय श्री गोकुल सोनी जी, विशिष्ट अतिथि के रूप में आदरणीया उषा चतुर्वेदी जी एवं कार्यक्रम के अध्यक्ष के रूप में आदरणीय चरनजीत सिंह कुकरेजा जी मंचासीन रहे, कार्यक्रम का संचालन,, श्रीमती दुर्गा रानी श्रीवास्तव ने किया।
आभार श्रीमती विद्या श्रीवास्तव ने जताया।
कार्यक्रम में सरस्वती वंदना आदरणीया उषा चतुर्वेदी जी ने प्रस्तुत की चरणजीत सिंह कुकरेजा जी ने, "मल्लाह तू पार लगाना, मन में विश्वास जगाना।" भावपूर्ण रचना पढ़ी।
मुख्य अतिथि श्री गोकुल सोनी ने सुंदर गीत, "जिंदगी की तपिश को सहन कीजिये।कष्ट आयें तो हँसकर वहन कीजिये" पढ़ा। उषा चतुर्वेदी जी ने कजरी प्रस्तुत की, बिहारी लाल सोनी ने "बरखा बहार लाई, पानी की धार लाई,"
"शिवकुमार दीवान ने, "गाँव-गाँव में दिख रही हरियाली चहुं ओर" एवम
कविता शिरोले जी ने, "तुझमें मुझमें नहीं किंतु ज़र्रे-ज़र्रे में रब दिखता है,"प्रेम चंद गुप्ता जी ने, "कहां हम जहां में अवम देखते हैं, जहां देखते हैं शुभम् देखते हैं, सविता श्रीवास्तव जी ने, "जब काले बादल आएंगे, रिमझिम पानी बरसाएँगे" सुनकर श्रोताओं का मन जीता। करुणा दयाल जी ने, "सावन की बरसे बदरिया, मोरी भीगे चुनरिया,"
रुपाली सक्सेना ने, "प्रेम गीत लिखो मीत कहती है मुझे प्रीत" दुर्गा रानी श्रीवास्तव, "क्यूँ युद्ध में मकान जलाकर चले गए,"वी.के. श्रीवास्तव जी ने, "भीष्म पितामह के दर्द को क़लम से बयां किया" विद्या श्रीवास्तव जी ने, "कविता की फितरत अपनी रचना के माध्यम से बताई, नीति श्रीवास्तव ने "प्रेम और धड़कन" पर अपनी रचना प्रस्तुत की। कुमकुम सिंह जी ने, बरसात पर तरन्नुम में ग़ज़ल प्रस्तुत की। सरला देवी सोनी श्रोता के रूप में उपस्थित रहीं। सभी मंचासीन अतिथियों ने सारगर्भित और मार्गदर्शक उद्बोधन दिए।
अंत में विद्या श्रीवास्तव जी ने सभी प्रबुद्ध साहित्यकारों का आभार व्यक्त किया।
जया आर्य ,अध्यक्ष, वरिष्ठ नागरिक काव्य मंच
भोपाल
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