ad

काव्य : वर्षा रानी - डॉ ब्रजभूषण मिश्र,भोपाल


 काव्य :

वर्षा रानी


वर्षा रानी तुम कर रही

परबत का आलिंगन

आओ ना चूमो अब

तुम धरती का आँगन


घूमो परबत,घूमो वन

घूमो नदी व सागर

मन की धरती भी है प्यासी

भर दो ये भी गागर


बहुत करी जन ने है प्रतीक्षा

लो ना और परीक्षा

सुख,शीतलता,और जल बाँटो

हो पूर्ण धरा की इच्छा


प्यास बुझे जल से थल,जन की

हो बीजों का अंकुरण

सूखी नदियों,और तालों में

हो अमृत का संचयन


बरखा रानी जम के बरसो

ठहरो,और थम के बरसो

धरा सजे और खेत सजें

ब्रज,जमीं हरषे,तुम भी हरषो


- डॉ ब्रजभूषण मिश्र,भोपाल

देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

Post a Comment

Previous Post Next Post