काव्य - सबका भला करता चलूँ
सुनो हिन्दू ना मुसलमान हूँ,
मैं तो केवल एक इन्सान हूँ।
है मानवता ही केवल मेरा धर्म,
इसे ही समझता अपनी शान हूँ।
मैं सदा करता रहूँ औरों पर उपकार,
जितना हो सके उतना हर बार करूँ।
निस्वार्थ भाव से करता रहूँ मैं कर्म,
सदा सरल व सत्य व्यवहार करूँ।
ना करूँ कभी भी किसी पर क्रोध,
कभी स्वयं पर करूँ ना अहंकार।
ईर्ष्या और द्वेष को नित मिटाता रहूँ,
बस ! करता रहूँ मानवता से प्यार।
चलता रहूँगा हमेशा सत्य पथ पर,
सदा मुश्किलों का सामना करता हूँ।
जीवन में बढ़ता रहूँ मैं सदा ही आगे,
सबका भला हो यही कामना करता हूँ।
- सलमान सूर्य, जनपद - बाग़पत,उत्तर प्रदेश भारत।
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