काव्य : बारिश
बचाता नहीं, बारिश से खुद को कभी
आंसुओ से भीगना ,मैं जानता हूं
करुण मन ने,छाते,ताने हैं बहुत
अनाथों के हिस्से के,अश्रु मै मांगता हूं
बारिश थमेगी कभी तो ,गरीबी की
*ब्रज*,समय बदलता ही है,जानता हूं
पैसों,अमीरी की बारिश भी थमती
मौसम ये बदले,दुआ मांगता हूं
- डॉ ब्रजभूषण मिश्र , भोपाल
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