काव्य कृति बुंदेली गौरैया का हुआ विमोचन : बिहारी सागर की कविताओं में लोकसंस्कृति है - डॉ (सुश्री) शरद सिंह
सागर। अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक संस्था हिंदी साहित्य भारती की नवगठित सागर शाखा के साहित्यिक कार्यक्रमों की शुरुआतनगर के वरिष्ठ कवि बिहारी सागर की नवम् काव्य कृति बुंदेली गौरैया का विमोचन व चर्चा पर केंद्रित कार्यक्रम से रविवार को स्वामी विवेकानंद अकादमी गोपालगंज में हुई। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. (सुश्री) शरद सिंह ने बिहारी सागर की कविताओं एवं सृजनकर्म पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि आज बुंदेली संस्कृति और गौरैया दोनों को सहेजना, संरक्षित करना आवश्यक हो गया है। ऐसे जटिल, खुरदरे एवं संवेदनाओं में शुष्कता ढोते समय में ‘‘बुन्देली गौरैया’’ काव्य संग्रह अपने नाम से ही उस मधुरता का आभास कराता है जिसमें लोकधर्मिता समाई हुई है। बिहारी सागर की कविताओं में यही सबसे बढ़ी विशेषता है कि उनकी कविताओं में लोक संस्कृति है और गौरैया का उनके प्रतीक सटीक है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि स्वामी विवेकानंद विश्वविद्यालय सागर के कुलाधिपति डॉ. अजय तिवारी ने अपने उद्बोधन में कहा कि
सागर साहित्य का वह सागर है जहां काव्य और रचनात्मक गतिविधियों की धारा सतत् प्रवाहित होती रहती है। इस दृष्टि से
नई संस्था के रूप में अंतरराष्ट्रीय हिन्दी साहित्य भारती की शाखा स्थापित होना स्वागतेय व गरिमामय निर्णय है।
अध्यक्षीय उद्बोधन में साहित्यकार पी आर मलैया ने कृति की रचनाओं को अत्यधिक भावपूर्ण व्यक्त करते हुए कहा कि जब कोई संवेदनशील मन अपने परिवेश के सक्रिय साहचर्य के परिणाम स्वरूप अत्यधिक भावप्रवण होता है तो उसकी यह भावप्रवणता अपनी अभिव्यक्ति का माध्यम खोजती है।यदि यह शब्दाभिव्यक्ति सरस हो तो उसे कविता या पद्य आदि संज्ञा प्राप्त हो जाती है।
अतिथियों द्वारा मां सरस्वती पूजन अर्चन और कवि ज.ला.प्रभाकर द्वारा सरस्वती वंदना के मधुर गायन से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। हिंदी साहित्य भारती के अध्यक्ष कवि अंबिका प्रसाद यादव ने स्वागत भाषण देते हुए संस्था के उद्देश्यों पर विस्तार पूर्वक प्रकाश डाला।
मंचीय अतिथियों और आयोजक संस्था द्वारा काव्य संग्रह बुंदेली गौरैया का विमोचन किया गया तथा कवि बिहारी सागर का शाॅल,श्रीफल, पुष्पहारों से सम्मान किया।
कवि मुकेश तिवारी ने अभिनंदन पत्र का वाचन किया तथा सुप्रसिद्ध बुंदेली गायक जगदीश सागर ने कृति की रचनाओं का स-स्वर गायन किया। इस अवसर पर युवा कवयित्री रचना राय ने भी काव्य पाठ कर श्रोताओं को प्रभावित किया।
रचनाकार कवि बिहारी सागर ने लेखकीय वक्तव्य देते हुए नगर के साहित्यकारों और श्यामलम् संस्था के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। आभार प्रदर्शन हिन्दी साहित्य भारती के कोषाध्यक्ष आर के तिवारी ने व्यक्त किया।
इस अवसर पर के एल तिवारी अलबेला, रमेश दुबे,श्यामलम् अध्यक्ष उमा कान्त मिश्र, आशीष ज्योतिषी,अभिनंदन दीक्षित, बसंत श्रीवास्तव, डॉ सुधीर तिवारी, प्रदीप चौरसिया,पूरन सिंह राजपूत, कपिल बैसाखिया,एड. राधा कृष्ण व्यास, अरुण दुबे, देवकीनंदन रावत, एम शरीफ, अशोक तिवारी अलख, प्रभात कटारे,शिवनारायण सैनी, पवन रजक, उपेंद्र सिंह ठाकुर, डॉ दिनेश कुमार साहू,परमानंद आनंद, पुष्पेंद्र दुबे, अमित आठिया, अश्विनी बलैया, रवि शंकर प्रजापति, सौरभ दुबे, बलराम मौर्य, टीकाराम कुर्मी की उपस्थित उल्लेखनीय रही।
डॉ चंचला दवे, सागर
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