काव्य :
आभार
आभार "एक जादुई अनुभूति,
अदृश्य शक्तियों के प्रति,
ईश्वर और प्रकृति के प्रति ,
औलोकिक प्रेम के प्रति ,
मानव जीवन सरलीकृत ,
उपलब्ध साधनो के प्रति,
अपनो के प्रति,सपनों के प्रति,
दायित्वों के प्रति, प्रेरणाओं के प्रति,
उन नकारात्मक शक्तियो के प्रति,
जिनसे लड़कर हमने अपना
विस्तार पहचाना, उन क्षणों का ,
जो पुरस्कार स्वरूप मिले,
अपनी देह- मन के प्रति,
जो साधन है, कर्मो की गति का,
जीवन की अनुभूति का,
वो खूबी -वो खामियाँ,
वो वजहें , जो मानव को
एक दूसरे का पूरक बनाती,
संसार रचाती है ,
वो वजहें जो विरक्त बना ,
मनुष्य को मानव जीवन
का उद्देश्य समझाती,
भटकाव से बचाती,
आध्यात्मिकता की यात्रा
का शुभारंभ करती,
हर परिस्थित मे आभार
उस ईश्वर का,जिसने
पुरस्कार स्वरूप जीव को
मानव जीवन देकर
जीवन चक्र से मुक्ति का,
यात्रा को विराम का,
एक अवसर दिया।
- रानी पांडेय,
रायगढ़ ,छत्तीसगढ।
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