काव्य :
76 वें गणतंत्र दिवस पर,
आओ अमर शहीदों के हम..
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इंजी. अरुण कुमार जैन
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हुये स्वतंत्र, गणतंत्र बना था, सच्ची स्वाधीनता पायी,,
अपनी धरती,अपनाशासन,
पराधीनता दूर भगायी.
हरेक हाथ को काम मिलेगा,
हरेक पेट को रोटी,,
घर, कपड़े व शिक्षा सबको,
यही कामना सबकी.
आज पिचत्तर वर्ष हो चुके,
फिर भी लक्ष्य न पाया,,
बड़ी अमीरी, बड़ी गरीबी,
अशिक्षा, रोग का साया.
आबादी प्रचण्ड बड़ गयी,
भू,जल, वायु, सीमित हैं,,
मुफ्तखोरी साथ बढ़ रही,
स्थिति बड़ी नाजुक है.
कुछ लोंगो तक सारे सुख हैं,
आरक्षण भी वे लेते,,
दूर झोपड़े वाले अब भी,
हैं वंचित व रोते.
इन वंचित तक सुख सुविधा हो,गणतंत्र तभी आएगा,,
प्रेम, नेह, विश्वास साथ हो,
तब भारत मुस्कायेगा.
देश हमारा, सम्पत्ति भी,
इसकी है रक्षा करना,,
तोड़ फोड़ विधवंश विनाश से,दूर सदा ही रहना.
श्रद्धा,आस्था नर नारायण के प्रति,निष्ठा हर मन आये,,
चलें प्रगति पथ पर मिल हमसब,भारत जग गौरव पाये.
आओ अमर शहीदों के,
हम सपनों को साकार करें,
भारत भू के हर कण तृण में,
नेह, प्रेम संचार करें.
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संपर्क, अमृता हॉस्पिटल, फ़रीदाबाद,
मो.7999469175
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