काव्य :
बसंत पर्व पर,
विश्व गौरव भारती माँ..
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इंजी. अरुण कुमार जैन
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शुभ आगमन है बसंत का, सुख, शांति, प्रेम अनंत का.
ठिठुरन भरी सर्दी गयी, नव कोंपलें अब आ गयीं,
ओढ़कर चूनर हरी, अब मुस्कराती है धरा. शुभ..
सुनहरी यह धूप, तन मन,
को लुभाती है बहुत,
इंद्रधनुषी फूलों से,
शोभित धरा प्रमुदित बहुत.
मन में नव उल्लास है,
लक्ष्य देखो पास है,,
दें बधाई भाव लाकर,
नेह, प्रेम, अपनत्व का.शुभ..
माँ वीणा पाणी शारदा, दें सुमति सारे विश्व को,
पढ़ें आगे नित बढ़ें,
मन सुमति पथ पर नित्य हो.
मन हर्ष, नेह, उमंग हो,
सहयोग, प्रगति संग हो,,
विश्व गौरव भारती माँ,
विश्व सारा संग हो.
आव्हान हर मन हो सदा.
शुभ आगमन है बसंत का,
सुख, शांति प्रेम अनंत का.
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संपर्क:अमृता हॉस्पिटल फ़रीदाबाद, हरियाणा,
मो :7999469175
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काव्य
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