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प्रभात साहित्य परिषद,भोपाल द्वाराकाव्य गोष्ठी का आयोजन हुआ


 प्रभात साहित्य परिषद,भोपाल द्वाराकाव्य गोष्ठी का आयोजन हुआ

भोपाल । प्रभात साहित्य परिषद द्वारा  हिन्दी भवन के नरेश मेहता कक्ष में *जाने कैसा कल होगा* विषय पर काव्य गोष्ठी का आयोजन श्री महेश प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में,श्री चंद्रभान राही के मुख्य आतिथ्य में,श्री अशोक धमनियां के विशेष आतिथ्य में तथा डा. अनीता तिवारी के संचालन में किया गया।

सरस्वती वंदना के उपरांत सूर्य प्रकाश अष्ठाना ने पढ़ा,_सोचो अच्छा पल होगा,जीवन खूब सफल होगा।वहीं महेश प्रसाद सिंह ने कहा,,_ गद्दार भरे है गली गली ,पग पग पर छल होगा,हर खंजर पे खून लगा है,जाने कैसा कल होगा। वहीं रमेश नन्द ने पढ़ा,_ सोच रहे है आज यही हम जाने कैसा कल होगा,उजियारे से ज्यादा शायद अंधियारे का बल होगा, वहीं हीरालाल परस ने पढ़ा, हमारा पड़ोसी भी बाज़ नहीं आ रहा ,नहीं संभला तो जाने कैसा कल होगा। वहीं चंद्रभान राही ने  पढ़ा,__  वक्त पड़ जाए तो सर को भी उड़ा देती हैं,इसलिए भेजी  है दुनियां में बेटियां उसने।वहीं डा  अनिल शर्मा" मयंक" ने पढ़ा ,_ बेइमानी घूम रही है, ईमानों के साए में,आज अगर है इतना काला,जाने कैसा कल होगा। वहीं कृष्ण देव चतुर्वेदी ने पढ़ा, _ सोच रहा मन भटका_ भटका,लिखा पढ़ा ग्रंथों में मैने,मीठा मीठा कल होगा। वहीं दिनेश भदौरिया शेष ने पढ़ा,_ बिगड़े है हालात आजकल,जाने कैसा कल होगा,नहीं पता है सुख या दुख का,अपना अगला पल होगा। वहीं सरोज लता सोनी ने पढ़ा,_ ओ तुर्की के आकाओं सुन लो,क्या अहसान हमारा भूल गए,जब कांपी थी धरती तुम्हारी,क्या मदद हमारी भूल गए। वहीं कमल सिंह" कमल" ने पढ़ा,_  इस धरती पर जल होगा,या मंज़र निर्जल होगा। वहीं संजय कुमार सोनटक्के ने कहा,_ बेवक्त मौसम बदलने लगे हैं। वहीं   सुरेश नारायण शर्मा ने पढ़ा,_ तू मेरा अज़ीज़ जिसने भी बोला होगा, वो ही धोखेबाज भी शायद निकला होगा। वहीं सीमा अग्रवाल ने पढ़ा,_ जाने कैसा कल होगा,आज नहीं वह कल होगा।पानी की बूंद बूंद को तरसेगा,केमिकल युक्त हर फल होगा। 

इसी अवसर पर पिछली काव्य गोष्ठी में प्राप्त रचनाओं में से सर्वश्रेष्ठ रचना के लिए परिषद ने श्रीमती वेरोनिका पीटर जी को सरस्वती प्रभा सम्मान से अलंकृत किया।

कार्यक्रम के अन्त में परिषद के संस्थापक रमेश नन्द ने सभी का औपचारिक आभार व्यक्त किया।



देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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