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अच्छे संस्कार ही अच्छे राष्ट्र की नींव है: युवराज स्वामी


अच्छे संस्कार ही अच्छे राष्ट्र की नींव है: युवराज स्वामी

संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा का द्वितीय दिवस

इटारसी। आज अपने बच्चों को दिए अच्छे संस्कार ही कल एक अच्छे और समृद्ध राष्ट्र की नींव है। जब बच्चों को घर, परिवार, स्कूल, कॉलेज, मित्र मंडल और समाज से दैनिक कार्यों में अच्छी बाते सिखाई जाती है, अच्छे संस्कार दिए जाते तो कल को यही बच्चे बड़े होकर अलग अलग क्षेत्रों में जाकर राष्ट्र का गौरव बढ़ाते हैं। उक्त उद्गार सरला मंगल भवन में श्रीमती मनोरमा देवी गुप्ता एवं परिवार बैंगलोर द्वारा आयोजित संगीत में श्रीमद् भागवत कथा के द्वितीय दिवस पर श्री श्री 1008 युवराज स्वामी रामकृष्णाचार्य जी महाराज ने व्यक्त किए। 
द्वितीय दिवस पर महाराज श्री ने श्री कपिलोपाख्यान एवं ध्रुव चरित्र की कथा विस्तार से सुनाई। व्यासपीठ से संबोधित करते हुए आचार्य ने कहा कि 
ध्रुव, राजा उत्तानपाद और रानी सुनीति के पुत्र थे। राजा अपनी दूसरी पत्नी सुरुचि से अधिक प्रेम करते थे। एक दिन, ध्रुव खेलते-खेलते अपने पिता की गोद में बैठ गए। सुरुचि ने ध्रुव को अपमानित किया और कहा कि वह राजा की गोद में बैठने के योग्य नहीं है, क्योंकि वह उसकी (सुरुचि) कोख से पैदा नहीं हुआ है. ध्रुव अपनी मां सुनीति के पास गए और उनसे इस अपमान का कारण पूछा। सुनीति ने ध्रुव को समझाया कि भगवान विष्णु ही एकमात्र सहारा हैं और उन्हें ही प्रसन्न करना चाहिए। ध्रुव ने घर छोड़ दिया और भगवान विष्णु की तपस्या करने के लिए जंगल में चले गए. जंगल में, ध्रुव को नारद मुनि मिले। नारद मुनि ने ध्रुव को "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करने और भगवान विष्णु की तपस्या करने की सलाह दी. ध्रुव ने नारद मुनि की बात मानी और छह महीने तक कठोर तपस्या की। उन्होंने एक पैर पर खड़े होकर भगवान विष्णु की आराधना की. 
उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर, भगवान विष्णु ने उन्हें दर्शन दिए और ध्रुव से उनकी इच्छा पूछी। ध्रुव ने भगवान विष्णु से अचल स्थान (ध्रुवतारा) का वरदान मांगा, जहाँ से उन्हें कोई भी हटा न सके. भगवान विष्णु ने ध्रुव की इच्छा पूरी की और उन्हें ध्रुवतारा का स्थान दिया। ध्रुव को ध्रुवतारा के रूप में जाना जाता है, जो आकाश में हमेशा स्थिर रहता है।  इस अवसर पर रमेश चांडक, सतीश बांगड़, श्रीकांत मोलासरिया, अर्पण माहेश्वरी, श्रीकृष्ण खेड़ियाजी रायपुर सहित अन्य लोगों का सहयोग रहा।
देवेन्द्र सोनी नर्मदांचल के वरिष्ठ पत्रकार तथा युवा प्रवर्तक के प्रधान सम्पादक है। साथ ही साहित्यिक पत्रिका मानसरोवर एवं स्वर्ण विहार के प्रधान संपादक के रूप में भी उनकी अपनी अलग पहचान है। Click to More Detail About Editor Devendra soni

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