जहाँ सफाई एक कर्म नहीं, एक पूजा है: इंदौर की दिव्यता
[कर्म की माटी में खिली स्वच्छता की सुनहरी फसल]
इंदौर, वह नगरी जो स्वच्छता के स्वर्णिम आकाश में सूरज-सा चमकता है, जिसने अपनी धरती को न केवल भारत का गौरव बनाया, बल्कि विश्व मंच पर एक अनुपम मिसाल कायम की। यह शहर केवल ईंट-पत्थर का समूह नहीं, बल्कि एक ऐसी सजीव कथा है, जो हर गली, हर चौराहे, हर नुक्कड़ पर स्वच्छता की अमर गाथा गाती है। स्वच्छता सर्वेक्षण 2024-25 में लगातार आठवीं बार भारत का सबसे स्वच्छ शहर बनकर इंदौर ने न केवल एक कीर्तिमान रचा, बल्कि हर भारतीय के हृदय में गर्व और प्रेरणा का दीप जलाया। यह उपलब्धि केवल आंकड़ों की जीत नहीं, बल्कि प्रशासन, स्वच्छता कर्मियों और जनता के अटूट समर्पण, जुनून और एकजुटता का वह अनमोल रत्न है, जो इंदौर को स्वच्छता का ताज पहनाता है। सूरत ने दूसरा और नवी मुंबई ने तीसरा स्थान हासिल कर इस स्वच्छता महायज्ञ में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज की, जबकि 3-10 लाख जनसंख्या वर्ग में चंडीगढ़, नोएडा और उज्जैन ने भी अपनी स्वच्छता की चमक बिखेरी। नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित एक भव्य समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इन विजेताओं को सम्मानित किया, जिसने इस उपलब्धि को और अधिक गौरवशाली बना दिया।
इंदौर की यह स्वच्छता कथा कोई साधारण उपलब्धि नहीं, बल्कि एक ऐसी क्रांति है, जिसने स्वच्छ भारत मिशन को नया आलोक प्रदान किया। स्वच्छता सर्वेक्षण, जो आज विश्व का सबसे विशाल शहरी स्वच्छता मूल्यांकन बन चुका है, ने 4,500 से अधिक शहरों को 10 मापदंडों और 54 संकेतकों के आधार पर परखा। कचरा प्रबंधन, सेवा वितरण और नागरिक भागीदारी जैसे पहलुओं पर इंदौर ने न केवल अपनी अजेय श्रेष्ठता साबित की, बल्कि सुपर स्वच्छता लीग में भी शीर्ष स्थान हासिल कर एक नया इतिहास रच दिया। यह लीग उन 15 शहरों की थी, जो पिछले तीन वर्षों में शीर्ष तीन स्थानों पर रहे, और इंदौर ने इसमें भी अपनी अनमोल बादशाहत कायम रखी। यह उपलब्धि इंदौर की उस अटल प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जो स्वच्छता को केवल एक लक्ष्य नहीं, बल्कि एक जीवनशैली मानती है।
2016 में जब इंदौर ने पहली बार स्वच्छता सर्वेक्षण में शीर्ष स्थान हासिल किया, तब से लेकर आज तक, इस नगरी ने अपनी स्वच्छता को न केवल बनाए रखा, बल्कि इसे और अधिक निखारा। इंदौर नगर निगम और स्थानीय प्रशासन की दृढ़ इच्छाशक्ति ने इसे संभव बनाया। 100% डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण, 98% स्रोत पर कचरे का पृथक्करण, और कचरे से सीएनजी उत्पादन जैसे अभिनव उपायों ने इंदौर को सात सितारा 'गार्बेज फ्री सिटी' की रेटिंग दिलाई। आंकड़े बताते हैं कि इंदौर में प्रतिदिन 1,200 टन कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन किया जाता है, जिसमें से 550 टन गीले कचरे से खाद और 50 टन से अधिक प्लास्टिक का पुनर्चक्रण होता है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव और नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय जैसे नेतृत्वकर्ताओं ने इस अभियान को एक जन-आंदोलन में बदल दिया। विजयवर्गीय का एक बयान, "सुपर स्वच्छ इंदौर, यह एक नया युग है!" इस शहर की स्वच्छता के प्रति उस अटूट विश्वास को दर्शाता है, जो हर इंदौरी के हृदय में बसता है।
इंदौर की स्वच्छता गाथा उन अनाम नायकों के बिना अधूरी है, जिन्हें हम 'सफाई मित्र' कहते हैं। ये स्वच्छता कर्मी, जो सूरज की पहली किरण से लेकर रात की अंतिम छाया तक सड़कों, नालों और गलियों को चमकाते हैं, इस शहर के असली हीरो हैं। स्वच्छता सर्वेक्षण 2023 में चंडीगढ़ को 'सर्वश्रेष्ठ सफाई मित्र सुरक्षित शहर' का पुरस्कार मिला, लेकिन इंदौर ने भी अपने सफाई मित्रों की सुरक्षा और सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। इन कर्मियों को आधुनिक उपकरण, प्रशिक्षण और सामाजिक सम्मान प्रदान किया गया, जिसने उनके मनोबल को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। ये सफाई मित्र केवल कचरा नहीं उठाते, बल्कि इंदौर की शान को हर दिन नया आलम देते हैं।
इंदौर की स्वच्छता का सबसे बड़ा रहस्य उसकी जनता है। यह शहर केवल प्रशासन की नीतियों या कर्मियों की मेहनत का परिणाम नहीं, बल्कि उन लाखों इंदौरियों का उपहार है, जिन्होंने स्वच्छता को अपनी संस्कृति बना लिया। कचरे को स्रोत पर अलग करना, सार्वजनिक स्थानों को स्वच्छ रखना, और स्वच्छता अभियानों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना—इंदौर की जनता ने हर कदम पर प्रशासन का साथ दिया। स्वच्छता सर्वेक्षण 2023 में 12 करोड़ नागरिकों की प्रतिक्रियाओं ने साबित किया कि स्वच्छता केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि जन-आंदोलन है। इंदौर में कचरे से सीएनजी उत्पादन और जैविक खाद जैसे नवाचारों ने न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा दिया, बल्कि नागरिकों में यह विश्वास जगाया कि उनका हर छोटा प्रयास मायने रखता है।
इस बार स्वच्छता सर्वेक्षण में एक नया प्रयोग हुआ। इंदौर, सूरत, नवी मुंबई, चंडीगढ़, नोएडा और उज्जैन जैसे 15 शहरों को सुपर स्वच्छता लीग में शामिल किया गया, जिसमें पिछले तीन वर्षों में शीर्ष तीन स्थानों पर रहे शहरों को रखा गया। इस लीग में 12,500 अंकों की स्कीम के तहत प्रदर्शन का मूल्यांकन हुआ, और इंदौर ने इसमें भी अपनी अजेयता साबित की। इसके साथ ही, एक नई पहल के तहत इन शीर्ष शहरों को कमजोर स्वच्छता स्कोर वाले शहरों को गोद लेकर उनकी स्थिति सुधारने की जिम्मेदारी दी गई। यह चुनौती इंदौर की नेतृत्व शक्ति को और परखेगी, साथ ही अन्य शहरों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।
सूरत, नवी मुंबई, चंडीगढ़, नोएडा और उज्जैन ने भी स्वच्छता के क्षेत्र में अपनी अमिट छाप छोड़ी। सूरत, जो पिछले वर्ष इंदौर के साथ संयुक्त रूप से पहले स्थान पर था, इस बार दूसरे स्थान पर रहा। नवी मुंबई ने लगातार तीसरे स्थान पर अपनी स्थिति मजबूत की, जबकि चंडीगढ़ और नोएडा ने 3-10 लाख जनसंख्या वर्ग में अपनी स्वच्छता की मिसाल कायम की। उज्जैन, मध्य प्रदेश का एक और रत्न, ने भी इस श्रेणी में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई। ये शहर साबित करते हैं कि सामूहिक इच्छाशक्ति और प्रयासों से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं।
इंदौर की यह उपलब्धि न केवल भारत, बल्कि विश्व स्तर पर स्वच्छता के नए मानक स्थापित करती है। स्वच्छ भारत मिशन का लक्ष्य अब शहरों को पूरी तरह कचरा-मुक्त बनाना है। इंदौर जैसे शहरों को अब न केवल अपनी स्वच्छता को बनाए रखना है, बल्कि अन्य शहरों को भी इस पथ पर ले जाना है। सर्वेक्षण की थीम 'रिड्यूस, रियूज, रिसायकल' पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। इंदौर का यह सफर हमें सिखाता है कि स्वच्छता केवल एक आदत नहीं, बल्कि एक संस्कृति है, जो हमारे शहरों को और अधिक सुंदर, स्वस्थ और रहने योग्य बनाती है।
इंदौर की स्वच्छता गाथा एक ऐसी प्रेरणा है, जो हर भारतीय के हृदय को झंकृत करती है। यह कहानी प्रशासन की दृढ़ता, स्वच्छता कर्मियों की मेहनत और जनता के अटूट विश्वास की त्रिवेणी है। लगातार आठवीं बार भारत का सबसे स्वच्छ शहर बनना केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि एक संदेश है—कि जब हम एकजुट होकर संकल्प लेते हैं, तो असंभव कुछ भी नहीं। इंदौर के सफाई मित्रों, प्रशासन और जनता को सलाम, जिन्होंने इस नगरी को स्वच्छता का स्वर्णिम ताज पहनाया। यह गाथा केवल इंदौर की नहीं, बल्कि हर उस भारतीय की है, जो अपने देश को स्वच्छ, सुंदर और समृद्ध देखना चाहता है।
- प्रो. आरके जैन “अरिजीत”, बड़वानी (मप्र)
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