काव्य :
गुरु पूर्णिमा
नमन किये बिना गुरुवर
होय न कोई काज
आशीष मिले गुरुजनों का
ईश्वर भी देते साथ
उपकार न भूलें कोई गुरु का
बुद्धि मिले अपार
ज्ञान का भंडार भरे
बढ़े दिन ओ रात
संशय न कीजे गुरु वचन
सच्चा गुरु करें न कभी पक्षपात
सोना खरा गुरुदेव हो
वन्दू बारम्बार
कमी रही कोई मुझमें
घडि़ये हाथ लगाय
घड़िये हाथ लगाय ।।
- चन्दा डांगी रेकी ग्रेंडमास्टर
मंदसौर मध्यप्रदेश
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