काव्य :-
गुरु
गुरु ज्ञान हैं,जीवन से पहचान हैं
पथ प्रदर्शक, शिक्षक, शुभचिंतक
दिशा देते,नम्रता सिखाते,समता रखते
भारतीय संस्कृति का अभिमान हैं
गुरु अक्षर हैं,शब्द हैं भाषा हैं
व्याकरण,जीवन शैली,व्यवहार हैं
अचार हैं,विचार व
अनुशासन
जीवन मे जय,पराजय व स्वाभिमान हैं
महिमा गुरु की है अपरम पार
बिन गुरु ,कैसे हो जीवन उद्धार
नेह, प्रेम ,आदर,व करुणा के द्वार गुरु
जीवन की साधना व सिखाते जीवों से प्यार
शब्द में, वर्णित हो कैसे गुरु की महिमा
गुरु तुल्य ,नहीं कोई जीवन में बना
दें शिक्षा हम संतानों को,करें गुरु सम्मान
ब्रज,बिन गुरु जीवन,न हो सफल,मान
- डॉ ब्रजभूषण मिश्र , भोपाल
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